120 25.2.1938 गरीबों के पेट पर लात मारने वाली सरकार का सत्ता से हटना ही बेहतर है - मुंबई - Page 131

110 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

आश्चर्य है। नए कर न लगा कर असल में अमीरों पर से खर्चे का बोझ कम किया गया है। इस व्यवस्था से गरीबों को कष्ट झेलने पड़ेंगे, क्या इस बात का अहसास अपने को गरीबों की सहायक कहलाने वाली सत्ताधारी मंत्रीमंडल को भूल से भी कभी हुआ है? इसीलिए मेरा यह साफ कहना है कि यह नया बजट गरीबों का नहीं है, अमीरों का है और इसमें रत्तीभर भी शक नहीं है। सच पूछो तो गरीबों को हर सरकार से मदद ही मिलनी चाहिए। हमें गरीबों की खातिर मेहनत करने वाली सरकार चाहिए। निजी स्तर पर जो अमीर अपने बीबी-बच्चों को सारी सुख-सुविधाएँ दे सकते हैं उन्हीं की संकट के समय मदद करने के लिए यह सरकार खड़ी हो जाती है यह क्या हास्यास्पद नहीं है? इस प्रकार गरीबों के पेट पर लात मारने वाली सरकार सत्ता में आए इससे बेहतर है कि वह सत्यात्याग करे ऐसा मुझे लगता है।

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण बेहद प्रभावशाली रहा। कहते हैं कि उनके जैसा बेहतर, असरदार, परिणामकारी, सिलसिलेवार भाषण आज तक मुंबई विधिमंडल में नहीं हुआ था। इस बारे में हम भी यकीन करते हैं।

ना, लट्ठे के द्वारा जवाब में जो भाषण दिया गया वह संतोषजनक नहीं था। वह केवल आधे घंटे तक बोले। इसी से पता चलता है कि अपने विरोधियों को सीधा और सिलसिलेवार जवाब देना अधिक उनके लिए कितना मुश्किल हुआ था इसका यकीन होता है। उन्होंने अपने भाषण के अंत में बताया कि सभी वर्गों की जनता के हित ध्यान में देकर, ईमानदारी से काम कर रही है।