121 7.3.1938 अपराधी को सुनाई सजा स्थगित करना यानी सजा को रद्द करना ही होता है - मुंबई - Page 132

111

121

* अपराधी को सुनाई गई सजा को स्थगित करना यानी सजा को रद्द

करना ही है

जाधवजी, गांधी और धीरजलाल इन दो अमीर लेकिन बदनाम सटोरियों को मुंबई हाईकेर्ट द्वारा जुए के आरोप में क़ैद की सजा सुनाई थी। मुंबई सरकार के गृहमंत्री ना. मुंशी ने उनकी इस सजा को अपने अधिकार के तहत स्थगित कर दिया था। इसके खिलाफ बैरिस्टर जमनादस मेहता द्वारा पिछले सोमवार को मुंबई लेजिस्लेटिव एसेंब्ली में कामकाज मुल्तवी की सूचना रखी थी क्योंकि लोकशक्ति सर्कुलर मामले में पहले से बदनाम ना. मुंशी ने ऐसा करके न्यायदान के कामकाज में अक्षम्य दखंलदाजी की थी।

इस सूचना के समर्थन में खुद बैरिस्टर जमनादास मेहता और मशहूर कानूनविद् और एसेंब्ली में स्वतंत्र लेबर पार्टी के नेता बैरिस्टर भी. रा. बनाम बाबासाहब अम्बेडकर ने विस्तृत भाषण दिए थे।

डॉ. अम्बेडकर ने इस सिलसिले में अपने 7 मार्च, 1938 के अपने भाषण में कहा था-

अध्यक्ष महोदय, इस प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए मैं यहाँ खड़ा हूँ। चर्चा के आखिर में मैं बोल रहा हूँ और गृहमंत्री जी को जवाब देने के लिए समय की ज़रूरत होगी इस बात को ध्यान में रखते हुए मैं यहाँ जो कहना चाहता हूँ वह संक्षेप में कहूँगा।

मेरी अपनी राय व्यक्त करते हुए एक बात जो मैं कहना चाहूँगा वह यह है कि जिस कृत्य को लेकर यह निंदाजनक प्रस्ताव लाया गया है उसके घटित होने को लेकर मुझे विस्मय नहीं होता।

वर्तमान सरकार ने अधिकार ग्रहण के बाद जितने ऐसे काम किए हैं जिन्हें निःसंशय कानून का भंग करना कहा जा सकता है उनमें यह कृत्य परिसीमा तक पहुँचने वाला है इसमें दो राय नहीं।

हालाँकि, कुल कामों का ही यह भी एक हिस्सा है। जो नायक जारी है उसका यह एक अध्याय है। इस नाटक का अंत कब होगा कुछ कह नहीं सकते। इनमें से पहले काम के रूप में बोर्डोली के किसानों का उदाहरण दिया जा सकता है। वहाँ के किसानों की जब्त की गई जमीनें उन्हें वापस दिलाने का जोखिम सरकार ने यहाँ सिर आँखों पर

* ख्., विविधवृत्तः 13 मार्च, 1938