112 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
लिया है। इसी बात का उदाहरण लिया जा सकता है। (एक सदस्य बीच में ही उठ कर
खड़े होकर बोलने की कोशिश करते हैं)। मुझे कम समय मिला है इसीलिए विनति है कि जो मैं कहना चाहता हूँ उसे आप पहले सुन लें यह मेरी आपसे विनति है।
अध्यक्षः ऑर्डर, ऑर्डर। सम्माननीय सदस्य नीचे बैठें। (डॉ. अम्बेडकर को उद्देश्य कर) मुझे डर है कि इस प्रकार अगर चर्चा जारी रखी जाए तो उसका क्षेत्र बढ़ता ही जाएगा। यहाँ मुद्दा यह नहीं है कि विगत कृत्यों के लिए सरकार जिम्मेदार है या नहीं है, मुद्दा यह है कि इस प्रस्ताव का विषय जो कृत्य है वह निषेधाई है या नहीं। सार्वजनिक रूप से जो व्यय महत्वपूर्ण बातें हैं उनसे यह बात जुड़ी है और प्रस्ताव को अनुमति मिलने के लिए इसका महत्वपूर्ण होना जिम्मेदार है। इसीलिए विवाद के दौरान भी गंभीरता बरतना लाजमी है। इसीलिए सम्माननीय सदस्यों से मैं यही विनती करता हूँ कि वे केवल पूर्वनिर्धारित बातों पर ही बोलें।
डॉ. अम्बेडकरः अध्यक्ष महोदय, आपके सामने यह मुद्दा प्रस्तुत करने की अनुमति मैं माँगता हूँ कि तुलना के लिए किसी बात को निर्धारित करना और इस बात की युक्तायुक्तता तय करने के लिए, उसके बारे में चर्चा करने के लिए उसका निर्देश करना इन दो बातों में फर्क है। बार्डोली की जब्त की गई जमीनें लौटाने की योग्यायोग्यता के बारे में अगर में चर्चा करता तो आपका निर्णय निश्चित रूप से मुझ पर लागू होता। इसलिए अगर मैं यह कहता हूँ कि इस कृत्य से सरकार के पुराने कृत्यों का सिलसिला चरम तक पहुंचा है या उनमें से किसी कृत्य का उसकी योग्यायोग्यता के विवाद में बिना पड़े अगर मैं निर्देश करता हूँ तो उसका यह मतलब नहीं निकलता कि मैं नियमों के खिलाफ जा रहा हूँ।
अध्यक्षः तय बातों के मसले सभा के समाने हैं, अन्य बातों का अगर निर्देश किया जाए तो चर्चा के दौरान अन्य विषय भी सामने आ सकते हैं इसलिए, स्थूल रूप से भी अन्य विषयों की ओर निर्देश करने की अनुमति देना मुझे योग्य नहीं लगता।
डॉ. अम्बेडकरः अगर यह बात है तो मुझे सभा के सामने रखे गए विषयों पर ही बोलना होगा। सो, सभा के सामने जो विषय हैं उनके बारे में मैं बस यही बताना चाहूँगा कि, इस मुकदमे से संबंधित सभी बातों का हमें पता नहीं चल पाया है। जो भी पता चला है वह बस अखबारों के जरिए ही पता चला है। हमारे सामने कोई पक्का सबूत नहीं है। इस मुकदमे से संबंधित सच बातें सभा के सामने रखने की विनति सम्माननीय गृहमंत्री से की गई थी लेकिन उन्होंने वैसा नहीं किया। इस कारण मुझे और सभा में उपस्थित अन्य लोगों को भी यह असुविधा सहनी पड़ रही है। सत्य बातें आखिर में जब सामने आ ही जाएंगी तब हो सकता है यह चर्चा अनावश्यक और अकालिक भी ऐसा साबित हो। अगर यह चर्चा अनावश्यक थी यह आगे चलकर साबित हुआ तो पूरा दोष