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गृहमंत्री जी के ही मत्थे आएगा इसमें भी कोई शक नहीं। क्योंकि खुद उन्होंने सभा को शामिल कराते हुए इस मामले से संबंधित पूरी बातें उसके सामने रखने से उन्होंने ही इंकार किया है। अगर इस प्रस्ताव को ऊपर बताए तरीके से अगर रखा जाता तो शायद प्रस्ताव रखने वालों की ओर से शायद वापिस भी लिया जाता, या अन्य सदस्य इस चर्चा में हिस्सा लेने में अपनी कोई खुशी नहीं यही बताते। हालांकि गृहमंत्री ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। सो अगर यह चर्चा व्यर्थ होने की बात सामने आती है तो जैसा कि मैंने ऊपर कहा है, तो उसके लिए गृहमंत्री ही जिम्मेदार होंगे।
अखबारों से हमें मिली जानकारी के आधार से इस मामले में अगर सोचा जाए तो यह मुद्दा उभरता है कि अपराधियों की सजा को स्थगित करने लायक क्या काई जानकारी सभा को प्राप्त हुई है? सम्माननीय गृहमंत्री जी उस पर शायद कहें कि हाईकोर्ट के पास सजा को स्थगित करने का अधिकार नहीं है इसलिए हाईकोर्ट द्वारा सजा को स्थगित करने से इंकार किया जाना सही कदम हुआ कि गलत यह सवाल ही यहाँ बेमानी है, मसला ये है ही नहीं। पते की और महत्वपूर्ण बात यह है कि सजायाफला अपराधी की सजा कम करने अथवा रद्द करने का जो अधिकार कानून गृहमंत्री को सौंपा है उसका उन्होंने सही इस्तेमाल किया या नहीं? तारतम्य जाँचने की खास सहूलियत उन्हें अधिकार के रूप में सौंपी गई है, उसका उन्होंने सही तरीके से इस्तेमाल किया है या नहीं? सम्माननीय गृहमंत्री जी ने अपने अधिकार पर सही अमल किया है अथवा नहीं इस बारे में फैसले पर आने से पहले कुछ बातें स्पष्ट करना जरूरी हैं।
अखबारों की जानकारी के अनुसार इस बारे में जो पहली बात तुरंत ध्यान में आती है वह यह है कि इतने बड़े पैमाने पर जुआ खेलने वाले ये लोग दरिद्री नहीं थे। यह पक्की बात है। पेट के लिए रोटी कमाने का कोई अन्य उपाय उनके पास नहीं था इसलिए वे जुए जैसे निंदनीय उपाय की ओर मुड़े या उन्हें मुड़ना पड़ा ऐसी बात नहीं थी। हाथ में आई जानकारी से पता चलता है कि ये लोग अमीर बनिये हैं, उनके पास तगड़ी पूंजी है, कई कंपनियों के वे मालिक हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में उनके दफतर हैं, कुल मिलाकर बहुत बड़े पैमाने पर उनका व्यापार चल रहा है। इससे यह बिल्कुल नहीं कहा जा सकता कि दरिद्रता के कारण या विपरीत आर्थिक स्थितियों के कारण उन्हें दुर्भाग्य से जुआ खेलने की राह अपनानी पड़ी हो। जो स्थितियाँ दिखाई दे रही हैं उनसे बिल्कुल उल्टे हालात साफ नजर आते हैं इसलिए ऊपर बताए कारण इन लोगों के बारे में सही हैं ऐसा नहीं कहा जा सकता। हाईकोर्ट में जो अर्जी दी गई थी उसमें भी इन लोगों की सजा स्थगित करने के लिए कोई अन्य कारण नहीं बताए नहीं गए थे। अपराधी बीमार थे या किसी रोग से पीडि़त थे ऐसा भी पता नहीं चलता है। इसका कोई सबूत उपलब्ध नहीं है। या फिर, उन पर कोई बड़ी पारिवारिक आपदा आई थी जिसके कारण उन्हें मुक्त किए जाने के अलावा कोई चारा ही नहीं था ऐसा भी कुछ पता नहीं चला है। इस