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किसी तरह की दिक्कत महसूस नहीं हो रही। सम्माननीय गृहमंत्री से मैं पूछना चाहता हूँ कि जिस करनी की समर्थनीयता की जनता को बताने लायक कोई वजह साफ तौर पर सामने नहीं आती हो ऐसे प्रस्तुत जैसा कोई काम क्या जनता के मन में राजनीति की और प्रशासन की सचाई के बारे में संदेह पैदा नहीं करेगा? एक और सवाल मैं पूछना चाहता हूँ और यह सम्माननीय मुख्यमंत्री से पूछना चाहता हूँ कि सम्माननीय मुंशी जी ने जो आदेश दिया उसकी जानकारी क्या मुख्यमंत्री को थी? यह आदेश मंत्रीमंडल की अनुमति से लिया गया था क्या? या फिर गृहमंत्री ने अपने अधिकार में यह आदेश निकाला था? इस सवाल को उठाने के पीछे तगड़ी वजह है। नए संविधान के अनुसार काँग्रेस का मंत्रीमंडल सामुदायिक जिम्मेदारी के सिद्धांत के अनुसार राज्य का कामकाज भले हमारे पास इसका कोई पुख्ता सबूत ना हो तब भी चला रहा है। यह हम मान कर चल रहे हैं। इसी कारण यह मामला पूरे मंत्रीमंडल के सामने या कम से कम कानूनन प्रांत के कामकाज के लिए जिम्मेदार व्यक्ति होने के नाते मुख्यमंत्री के सामने रखा गया होगा यह मानने में हमें कोई दिक्कत पेश नहीं आ रही है। इस बात का जिक्र करना या अब सवाल पूछना मैं टाल नहीं सकता। क्योंकि मेरी राय में यह बेहद गंभीर मसला है। अपराधी को सुनाई गई सजा को उस पर अमल होने से पहले मुल्तवी करना कानून को उखाड़ना ही है। इसलिए मैं इस निष्कर्ष तक पहुँचा हूँ कि प्रांत की सरकार का कामकाज और जनता के कल्याण पर गंभीर असर डालने वाले ऐसे काम मुख्यमंत्री की जानकारी के बगैर हुआ है। मेरे लिए यह जानना जरूरी है कि मेरा यह निष्कर्ष सही है या गलत। सो, उम्मीद करता हूँ कि मंत्रीमंडल द्वारा मेरे इन सवालों के जवाब दिए जाएंगे।