116 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* सत्याग्रह की सफलता का श्रेय सबका है, मुझ अकेले का नहीं
19 मार्च, 1938 के दिन सोमवंशीय हितकारी समाज तथा ताडवाडी के अखिल अस्पृश्य रहिवासियों के तत्वावधान में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर और डॉ. पी.जी. सोलंकी को मानपत्र और थैली अर्पण करने का समारोह आयोजित किया गया था।
उपर्युक्त समाज की ओर से महाड सत्याग्रह के ग्यारहवें स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में अस्पृश्य समाज के इकलौते नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर और डॉ. पी.जी. सोलंकी को उनके सर्वश्रेष्ठ और बहुमूल्य योगदान के लिए मानपत्र एवं थैली देकर उनका अभिनंदन करने का बड़ा सार्वजनिक समारोह शनिवार 19 मार्च, 1938 के दिन ‘विविधवृत्त हे साप्ताहिक पत्रिका के मशहूर, विद्वान संपादक के रा. का. तटणीस की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सभास्थान रंगबिरंगी पताकाओं से और फूलों से सजाया गया था। वह महाड स्मृति दिन होने के कारण वहाँ के कार्यकर्त्ताओं ने समारोह से पहले झंडे को वंदन किया। सोमवंशीय हितकारी समाज के अध्यक्ष श्री रामभाऊ बोटीकर की अध्यक्षता में स्मृतिदिवस मनाया। पहले श्री कंटदीकर ने महाड सत्याग्रह के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उसके बाद मिठगावकर और श्री डोलस आदि वक्ताओं के इसी विषय पर भाषण हुए और रात 9.30 बजे मुख्य कार्यक्रम की शुरूआत हुई।
मंच पर मुंबई लेजिस्लेटिव एसेंब्ली के भाई चित्रे, भाऊराव गायकवाड, डी.जी. जाधव, खंडेराव सावंत, भातनकर आदि विधायक_ एडवोकेट तलपदे, स्वतंत्र लेबर पार्टी की सचिवद्वय श्री कमलाकांत चित्रे और एस. ए. उपशाम, नायागाव सेवा मंडल की मिस चाइल्ड, आर.सी.ए. मिशन की मिस डेसूर बाई और उनकी सहयोगी महिला, कई संस्थाओं के तथा अस्पृश्य वर्गीय कार्यकर्त्ता मुख्य रूप से उपस्थित थे। डॉ. बाबासाहेब के सभास्थान पहुँचते ही समता सैनिक दल के बैंड के ताल पर उन्हें सैनिकों सी सलामी दी। तालियों की कड़कड़ाहट से तथा जयध्वनि से आस-पास का वातावरण निनादित होता रहा।
पहले कुछ सामाजिक पद और पोवाडे गाए गए। उसके बाद श्री करंदीकर ने संक्षेप में अध्यक्ष का परिचय दिया। उनसे अध्यक्ष स्थान स्वीकारने की विनति की। श्री आर.आर. ढसात ने उसका समर्थन किया। उसके बाद तालियों की गड़गड़ाहट....................के साथ स्थानापन्न हुए। समारोह के लिएआए भास्कर राव जाधव आदि महान नेताओं के संदेश उन्होंने पढ़ कर सुनाए। साथ ही मानपत्र स्वीकारने में अस्वास्थ्य के कारण असमर्थता
* ख्., जनता, 9 अप्रैल, 1938