122 19.3.1938 सत्याग्रह की सपफलता का श्रेय सबका है, मुझ अकेले का नहीं - ताडवाडी - Page 139

118 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

बात बस यह कि मेरा व्रत उस तरह का व्रत नहीं है। मेरा व्रत आज दोपहर शुरू होगा और आगे दो दिनों तक चलेगा-दो दिन और दो रातों तक व्रत रख कर मैं सोमवार की दोपहर में अन्न ग्रहण करूँगा। इन दो दिनों मं पानी तक नहीं पिऊंगा। इतना कड़क उपवास है यह। बाकी मनौतियां आदि मनाने के लिए उपवास रखते हैं। लेकिन डॉक्टर ने उपच के कारण मुझे हफते में दो दिन खाली पेट रहने के लिए कहा है। शरीर स्वस्थ्य के लिए मुझे यह व्रत रखना पड़ रहा है। इसीलिए इस दौरान में अधिक बोल नहीं पाऊंगा। आज मुझे जो मानपत्र और थैली दी गई है उसके लिए मैं यहाँ के लोगों के प्रति बहुत कृतज्ञ हूँ। दूसरी बात यह है कि, आज का मानपत्र रूखा-सूखा नहीं है, उसके साथ एक थैली भी है। मानपत्र का बड़ी खुशी के साथ स्वीकार कर यह थैली स्वतंत्र लेबर पार्टी को देने की घोषणा करता हूँ।

इस मानपत्र में अस्पृश्यों के आंदोलन का आज तक मैंने जो मार्गदर्शन किया उसका योग्य शब्दों में वर्णन किया है इसका मुझे संतोष है। मेरे काम का जो अलंकारिक वर्णन किया गया है वह असल में आप सभी के कठोर परिश्रम का फल है। महाड के ‘चवदार तालाब सत्याग्रह’ और नासिक ‘मंदिर प्रवेश सत्याग्रह’ के कारण हमारे आंदोलन के बारे में दुनिया को पता चला, हमारे आंदोलन को सफलता मिली। इन दोनों अवसरों पर मेरे भाई चित्रे और भाऊराव गायकवाड का साहस और कई संकटों का सामना करते हुए काम करने की लगन ही काम आई है, यह उसी का फल है।