120 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के दो और पुरुषों के दो गुट हैं। पूछताछ करने पर पता चला कि महिलाओं का इधर वाले गुट ने स्वतंत्र लेबर पार्टी का सदस्यत्व लिया है और उधर वाले गुट ने नहीं लिया है। इन दो गुटों में सदस्यत्व न लेने वाली महिलाओं का गुट बड़ा दिखाई दे रहा है। इस बात का मुझे अचरज लगता है कि जिन महिलाओं और पुरुषों को यहाँ आकर सभा में क्या कार्य हो रहा है यह जानना होता है उन्हें आठ आने देकर सदस्यत्व लेने की बुद्धि क्यों नहीं आती? क्या आपने कभी सोचा है कि स्वतंत्र लेबर पार्टी का कुल कामकाज किसके लिए है? क्यों चल रहा है? यह काम आप पर और हम पर औरों से जो जुल्म ढाए जाते हैं उन्हें नष्ट करने के लिए है। सो, इस कामकाज के लिए मदद करना क्या आपका कर्त्तव्य नहीं है? यहाँ इक्ट्ठा महिलाओं में से कुछ महिलाओं को पान-सुपारी चबाने की आदत होगी। उसके लिए हर माह उनके रुपए दो-रुपए खर्च होते होंगे। ऐसे में स्वतंत्र लेबर पार्टी के काम के लिए सालाना आठ आने देने की बात उन्हें क्यों समझ में नहीं आती? मुझे महार महिलाओं से ही उम्मीद है। वे अगर स्वतंत्र लेबर पार्टी का सदस्यत्व लेती हैं तो पुरुषों को भी उनकी तरह सदस्यता लेनी पड़ेगी। अब तक आप लोग आठ आने देकर स्वतंत्र लेबर पार्टी के सदस्य नहीं बने इसका मुझे खेद है। हालांकि मुझे उम्मीद है कि जल्दी ही आप सभी स्वतंत्र लेबर पार्टी के सदस्य बनेंगे।
पुरुषों से भी मैं यही कहना चाहता हूँ कि आपके हित के लिए स्वतंत्र लेबर पार्टी काम करती है और आप में से केवल चार हजार लोगों ने ही उसकी सदस्यता ली है यह सचमुच शर्मनाक बात है। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि क्यों आप सब लोग इस पार्टी के सदस्य क्यों नहीं बन पा रहे हैं? काँग्रेस की केवल अमीरों की सहायता करने वाली संस्था के खिलाफ गरीबों के न्याय दिलाने का काम स्वतंत्र लेबर पार्टी कर रही है। आज एसेंब्ली में काँग्रेस से जवाब मांगने वाली और गरीबों की तरफदारी करने वाली एक ही पार्टी है और वह है स्वतंत्र लेबर पार्टी। काँग्रेस की तरह मुझे इस पार्टी के लिए अमीरों से पैसा नहीं मिल सकता, ऐसी बात नहीं है। कोशिश करूँ तो मैं अमीरों से भी इस पक्ष को बहुत सारे पैसे दिला सकता हूँ। लेकिन इस प्रकार अगर अमीरों के पैसों से अगर इस पार्टी का काम चले तो इस पार्टी की खासियत खत्म हो जाएगी। अमीर लोगों द्वारा यह पार्टी खरीद ली गई है, ऐसा होगा। फिर यह पार्टी गरीबों के हित में कैसे लड़ पाएगी? इसीलिए, गरीबों के हित के लिए अस्तित्व में आई स्वतंत्र लेबर पार्टी की मदद गरीबों को ही करनी होगी। इससे ही आपकी आजादी कायम रहेगी। गरीबों की गृहस्थी गरीबों को ही चलानी चाहिए यह बात अगर आप समझे हों तो मुझे उम्मीद है कि मुंबई शाखा के सदस्यों की संख्या चार हजार से चालीस हजार होने में देर नहीं लगेगी। याद रखें देश की आजादी काँग्रेस के सेठ-भट नहीं लाएंगे बल्कि स्वतंत्र लेबर पार्टी के श्रमजीवि वर्ग ही ले आएंगे।