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* सामाजिक उन्नति का कारण है बदले हुए हालात

पहले ही की गई घोषणा के अनुसार शुक्रवार दिनांक 1 अप्रैल, 1938 की रात मुंबई की डेविड मिल चॉल के आगे वाले शैतान चौकी के मैदान पर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की अध्यक्षता में सभा हुई थी। वहाँ 15 से 20 हजार तक के समुदाय की यह पहली ही सभा थी। सभा के आयोजकों ने इस सार्वजनिक सभा के लिए ‘लाऊड स्पीकर’ की सुविधा उपलब्ध कराई थी। धो. ना. गायकवाड, सभा के असली कार्यकर्त्ता श्री खैर मोउे के प्राथमिक भाषणों के बाद विधायक के एस सावंत ने सभी को सभा का महत्व समझाया। फिर सभा के आयोजकों द्वारा डॉ. अम्बेडकर से बोलने की प्रार्थना की गई।

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर बोलने के लिए उठ कर खड़े हुए तो वातावरण तालियों और जयकार की आवाज से गूंज उठा। उन्होंने अपने भाषण में कहा,

यहाँ इक्ट्ठा हजारों भाई-बहनों का मैं अभिनंदन करता हूँ। आनंद व्यक्त करता हूँ। यहाँ सभा में आने का यह दूसरा मौका है। हलांकि सात-आठ साल पूर्व मैं जब यहाँ आया था तब की और आज की सभा के हालात में जमीन-आसमान का फर्क है। आज की सभा में तब की सभा से कल्पनातीत फर्क हुआ है यह दिखाई दे रहा है। पहली बार मैं जब यहाँ सभा के लिए आया था तब सालुंके नाम के एक गुसाईं का यहाँ कीर्तन सप्ताह जारी था। मेरे भाषण से अधिक यहाँ के लोगों को उनके कीर्तन को सुनने की उत्सुकता थी। मैं केवल आठ-दस मिनटों तक बोल कर चला गया। आज इसी जगह मेरा ही भाषण सुनने के लिए हजारों लोगों को इक्ट्ठा देख कर मुझे आश्चर्य और कोतुक हो रहा है। पिछले आठ-दस सालों में लोगों के मन पर जो असर हुआ था वह कितना असरदार है इसका तुरंत अहसास हुआ। इस प्रकार मैं समझता हूँ कि, पिछले दस सालों में स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की हमारी लड़ाई का अस्पृश्य बंधुओं पर कितना असर हुआ है वह अलग से बयान करने की जरूरत नहीं हैं। आज यहाँ इक्ट्ठा लोग मेरे अलावा किसी और का भाषण सुनने के लिए तैयार नहीं है। आज जो ये बदले हुए हालात दिखाई दे रहे है। इसका कारण है- समाज की सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक उन्नति की दिशा में किए गए प्रयास।

* ख्., जनता, 9 अप्रैल, 1938