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में भट, सेठ, गुजर और साहूकार ही भरे हैं। उसमें गरीब किसान या श्रमजीवी वर्ग की कोई जगह नहीं। आज के हालात पर ध्यान दें लगता है कि गांधी जी के बाद यहाँ की राजनीति में गड़बड़ पैदा होगी। आज हम राजनीति में जो कुछ कर रहे हैं, सोचिए, क्या गांधीजी के बाद कोई इसे चलने देगा? महत्व देगा? इस बारे में अभी किसी ने सोचा ही नहीं। इसीलिए, अपने हित के लिए और देश के हित के लिए, आजादी पाने के लिए पृथक आंदोलन कीजिए। मैं यह नहीं कहता कि मेरी पार्टी में ही आइए। लेकिन अपने अधिकारों की रक्षा की जा सके इसलिए आंदोलन कीजिए। आप मराठा लोगों से एक बात कहनी है कि आपके हित के लिए हमारे विचारे मास्तर ने किसान पार्टी की स्थापना की है। मराठा लोग जरूर उनकी मदद करें। साथ ही जहाँ आरक्षित जगहें नहीं हैं वहाँ के अस्पृश्य लोग भी इस नई किसान पार्टी की ओर से खड़े उम्मीदवार की मदद करें। लोकल बोर्ड के इन चुनावों में कोई अगर झूठे वादे करे या लालच दे तो आप उसके झांसे में ना आए। अपने पवित्र मत बेचें नहीं उनका सही उपयोग करें।
डॉ. बाबासाहेब के भाषण के बाद श्री विचारे का भाषण हुआ। उसके बाद फूलमालाएँ अपर्ण विधि संपन्न हुआ। उसके बाद डी. एस. पवार ने मेहमानों को बढि़या भोज खिलाया।