127 20.4.1938 औरों पर निर्भर रहना यानी एक बार पिफर पेशवाई वाला मटका गले में लटकाना होगा - ओंड - Page 147

126 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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* औरों पर निर्भर रहना यानी एक बार फिर पेशवाई वाला मटका

गले में लटकाने जैसा होगा

20 अप्रैल, 1938 के दिन दोपहर तीन बजे ओंड में सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा में 6 हजार से अधिक केवल अस्पृश्य जनसमुदाय उपस्थित था। विधायक के. एस. सांवत ने ओंड़ गांव और वहाँ के प्रमुख लोगों का परिचय दिया। उसके बाद पृथक मजदूर पार्टी के हर किसी ने सदस्य बनने की विनती की। उसके बाद कराड के श्री शोखडे ने जनता अखबार और स्वतंत्र मजदूर पार्टी के बारे में जानकारी दी। फिर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने भाषण दिया।

डॉ. अम्बेडकर ने अस्पृश्यों की पहले और आज की स्थिति के बारे में तुलनात्मक जानकारी देने के बाद अपने भाषण में कहा,

‘‘आज से अधिक बलशाली और मजबूत संगठन होना जरूरी है। स्वतंत्र लेबर पार्टी के सदस्य बन कर इस संगठन को मजबूत बनाया जाए तो हमारी सभी तरह की कठिनाइयों पर गौर किया जाएगा। यही पार्टी आपके हितों की रक्षा करेगी। आप कभी भी औरों पर निर्भर नहीं करना। औरों पर निर्भर रहने का मतलब है फिर पेशवे युग का मटका गले में बांध लेना।

उसके बाद हर गांव की ओर से डॉ. अम्बेडकर का फूलमालाएँ अपर्ण की गईं। इस कार्यक्रम के बाद लौटते हुए शिवडे, तहसील कन्हाड में पान-सुपारी समारोह संपन्न हुआ। गांव वालों के साथ ही साथ यहाँ मेघराजा ने भी डॉ. अम्बेडकर का कुछ देर तक स्वागत किया। समारोह में उवाले ने उपस्थित लोगों से विनति की कि यात्रा के दौरान डॉ. अम्बेडकर साहेब को काफी तकलीफ हुई है इसलिए जहाँ तक संभव हो उन्हें ज्यादा तकलीफ नहीं दी जाए। इसके बावजूद लोगों ने आग्रह किया तो डॉ. साहेब भाषण देने के लिए उठकर

खड़े हुए। उन्होंने बताया, अगले माह की 24 तारीख को इस जिले के डिस्ट्रिक्ट लोकल बोर्ड के चुनाव होने हैं। इस तहसील में स्वतंत्र लेबर पार्टी की ओर से गणपत भीकाजी बाघमारे चुनावों में हिस्सा ले रहे हैं। आप सब अपना वोट उन्हीं को दें। उम्मीद है आप सब मेरे बताए अनुसार ही चलेंगे। इसके बाद डॉक्टर बाबासाहेब कार से सातारा के लिए रवाना हुए। वहाँ में काशिनाथ कांबले, भोसले, केखा मेढेकर और बनसोडे मास्टर ने उन्हें फूलमालाएँ पहनाईं। डॉ. अम्बेडकर वहाँ से आगे पुणे के लिए निकल गए।

* ख्., जनता, 30 अप्रैल, 1938