129
129
* चुने गए लोग अपना काम करते हैं या नहीं इस पर ध्यान रखें
मंगलवार 10 मई, 1938 की सुबह डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर मेल से नागपुर पहुँचे। किसी आपराधिक मुकदमे के सिलसिले में वह आए थे। वह नागपुर में है इस बात पर हर किसी को तब तक विश्वास नहीं हो रहा था जब तक कि वे ख्ुद उन्हें देख नहीं लेते थे। कई लोगों ने मिलों से छुट्टी लेकर खुद अपनी आंखों से उन्हें देख कर यकीन किया। इस प्रकार हजारों की संख्या में जनसमुदाय जुटने लगा। आज कचहरी का कामकाज न होने के कारण सोचने-समझने के लिए थोड़ा समय मिला। उसी का फायदा उठाते हुए उनसे विनति की गई कि वे हमें आधे घंटे का समय दर्शनार्थ दें। बाबासाहेब के नेतृत्व में चलने वाले पृथक मजदूर संघ, नागपुर नगर तथा समता सैनिक दल आदि संस्थाओं ने तुरंत इंदोरा में उनके सार्वजनिक सम्मान समारोह का आयोजन किया। समारोह के समय जोरदार हवाएँ चल रही थीं, घनघोर बरसात हो रही थी और बिजलियाँ भी कड़क रही थीं। उसके बावजूद बाबासाहेब के दर्शन के लिए लोगों के झुंड के झुंड वहाँ जमा होने लगे। सत्यप्रसारक जलसा मंडल इंदोरा की ओर से भव्य मंच की व्यवस्था की गई। समता सैनिक दल के सैनिक अपनी वर्दी में हाजिर हुए। इस सभा के बीस हजार से अधिक पुरुष, महिलाएं उपस्थित थे। सब बाबासाहेब के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। रात साढ़े नौ बजे बाबासाहेब की मोटर आते ही सैनिकों की ओर से पहले बैंड से बंदना दी गई। गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। बाबासाहेब के मंच पर विराजमान होते ही तालियों की गड़गड़ाहट होने लगी। उनके नाम की जयकार से वातावरण गूंज उठा। तब मंच पर आकर श्री आर. आर. पाटिल, सचिव, मध्य प्रांत और वन्हाड दलित फेडरेशन ने लोगों को उद्देश्य को कहा, ‘‘भाइयों और बहनों, आप घंटे भर से जिस भगवान का इंतजार कर रहे हैं वह भगवान आप सबके सामने मंच पर उपस्थित हुआ है। आप उन्हें फूलमालाएं अर्पण करने के लिए उत्सुक हैं। मैं नाम लूंगा तब तक एक कर आकर आप बाबासाहेब को फूलों की माला अर्पण करें। स्वतंत्र लेबर पार्टी, नागपुर, नगर दलित फेडरेशन और समता सैनिक दल की ओर से फूलमालाएँ पहनाई जाने के बाद भारतीय सत्यप्रसारक जलसा मंडल, बेझनबाग, अम्बेडकर सोशल क्लब लाइब्रेरी, साहित्य चर्चामंडल, अस्पृश्य महिला बस्तीगृह, अम्बेडकर सहायक समाज, विजयी समाज, महार नवयुवक दल भानखेडा, बालवीर वाचनालय-सिरसपेठ, समता विजयी समाज, कुंभारपुरा
* ख्., जनता, 14 और 21 मई, 1938