130 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
आदि कई गुटों की ओर से फूलमालाएं अर्पण की गईं। यहाँ सबके नाम स्थानाभाव के कारण देना संभव नहीं है। इसके बाद श्री बाबू मेश्राम, इंदोरा की ओर से एक छोटा-सा ‘पोवाडा’ गाया गया जिसमें डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के कामों का वर्णन था। फिर डॉ. बाबासाहेब से दो शब्द कहने की विनति की गई। पलभर में कहाँ सुई के गिरने की आवाज सुनाई दे ऐसी शांति हो गई। बाबासाहब बोलने के लिए उठकर खड़े हो रहे हैं यह देख कर तालियों की जोरदार गड़गड़ाहट हुई। उनके नाम की जम बोली गई है। डॉ. बाबासाहेब ने कहा,
‘‘भाइयों और बहनों,
इतने कम समय में, जोरदार हवाएँ-बारिश कड़कती बिजली भरे वातावरण में आप इतने लोग यहाँ उपस्थित हुए हैं- मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूँ। दूसरी बात यह कि मैं जिस काम के लिए यहाँ आया हूँ उस काम के लिए लोग मेरा इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में, उनसे अधिक इंतजार करवाना मुझे शोभा नहीं देता। सो, आपका अधिक समय न लेते हुए एक-दो बातों का जिक्र कर में अपना भाषण खत्म करूंगा। आपके प्रांत में जो फूट पड़ी है उसके बारे में बोलने के लिए समय कम पड़ेगा इसलिए उस बारे में मैं फिर कभी बोलूंगा। आप जानते होंगे कि आपके प्रांत के लिए 20 सीटें मंजूर हुई हैं। उन्हें पाने में बहुत कष्ट उठाने पड़े। उन्हें बनाए रखना आपका कर्त्तव्य है। अस्पृश्य समाज गरीब और निर्धन है। राजनीतिक सत्ता अपने हाथ में चिपकाए रखना उनके लिए कठिन है। काँग्रेस जैसी महत्ता के साथ भिड़ना कठिन काम है। सो ऐसे मुश्किल समय में आपको मिली राजनीतिक सत्ता को बनाए रखना बेहद मुश्किल है। चुनावों में आपने जिन्हें जिताया वे ठीक से, आपके हित का काम करते हैं या नहीं यह देखना भी आपका काम है। उनके काम पर नजर रखना, कौंसिल में आपका जो काम होता है उसमें आपके हित के सवाल, प्रस्ताव आदि रखते हैं या नहीं यह देखना आपका कर्त्तव्य है। हर सेशन सत्र के अंत में उनके द्वारा किए गए काम के बारे में आज की तरह सभा का आयोजन कर उनसे पूछ सकते हैं। जो आपके हित का काम नहीं करते हैं उनके खिलाफ वे जिस कौन्स्टीटयूएंसी से चुनाव जीते हैं वहाँ जाकर उनके खिलाफ प्रचार करना आपका कर्त्तव्य है। जिस प्रकार उन्हें चुनाव में जिताना आपका कर्त्तव्य है उसी प्रकार उनके काम पर नजर रखना भी आपका आद्य कर्त्तव्य है। इस प्रकार उन पर नजर रखी जाती है यह जानने के बाद डर कर ही सही वे काम करेंगे। इस प्रकार काम अगर होता रहा तो आपके हित का बहुत सारा काम होगा। आज समय भाव के कारण मुझे अपना भाषण यहीं रोकना पड़ेगा। इतना कह कर डॉक्टर साहब ने अपना भाषण पूरा किया। इसके बाद डॉक्टर साहब और इक्ट्ठा लोगों के प्रति धन्यवाद अपर्ण के बाद डॉक्टर साहब की जयकार ध्वनि के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।