130 11.5.1938 ...तो अपनी अलग यूनियन बनाएं - नागपुर - Page 152

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* .....तो अपनी अलग यूनियन बनाएँ

11 मई, 1938 में नागपुर में सुबह 8 बजे डॉ. अम्बेडकर का छात्रों द्वारा स्वागत किया गया। उस वक्त डॉ. अम्बेडकर ने छात्रों से कहा कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वे समाज कार्य करें, समाज की सेवा करें। 10 बजे से 4.30 बजे तक वे दफतर गए। शाम 6 बजे वह कामठी चले गए। वहाँ श्री हरदास एल. एन के साथ उनका सार्वजनिक स्वागत किया गया। लोग बड़ी संख्या में इक्ट्ठा हुए थे लेकिन दुष्ट बारिश से यह देखा नहीं गया। लोगों के उत्साह को दबाने के लिए उसने अपना उग्र रूप धारण किया। इसलिए समारोह को थोड़े सयम में निपटाना पड़ा। फूलमालाएँ अपर्ण करने का समय नहीं बचा तो सैंकड़ों फूलमालाएँ उनकी गाड़ी पर ऊपर से डाली गईं।

इस प्रकार कामठी का कार्यक्रम निपटा कर आने के बाद उनके ठिकाने पर कई कार्यकर्त्ता इक्ट्ठा हुए। उनके बीच हुई बातचीत और चर्चा लोगों के हित में होने के कारण यहाँ देना अनुचित नहीं होगा।

पहले जी.आई.पी. रेल कामगारों ने सवाल पूछा कि हम रेलवे की यूनियन में शामिल हों या नहीं। इस प्रश्न का उत्तर देते हुए डॉक्टर साहब ने कहा, यूनियन अगर आपके हित का काम कर रहा हो तो आपको जरूर उसमें शामिल होना चाहिए। सभी को उसका सदस्य बनना चाहिए। आपके द्वारा दिए गए चंदे में से पाँचवाँ हिस्सा अगर आपके हित के लिए आरक्षित रखता हो, आपकी संख्या के अनुपात में प्रतिनिधि ले रहा हो और आपके हित में काम करता हो तो सब जरूर उसके सदस्य बनें। वरना अपना अलग यूनियन बनाएँ। मिलों में काम करने वाले मजदूरों के लिए भी यह नियम लागू है। इसके बाद नागपुर के कार्यकर्त्ताओं की तरफ उन्होंने रूख किया। उनमें एम.एल. 8, उनके सचिव, सि. स्टे से कमेटी महापालिका सदस्य श्री आर. आर. पाटिल, सचिव, मध्य प्रांत और वन्हाड फेडरेशन और अन्य विरोधी पार्टी के सदस्य और कई नागरिक उपस्थित थे। रात साढ़े बारह बजे तक यह निजी वार्तालाप चल रहा था। इस वार्तालाप का प्रमुख हिस्सा संक्षेप में आगे दिया जा रहा है-

विरोधी पार्टी और डॉ. बाबासाहेब की पार्टी की कमियों के बारे में देर तक चर्चा होने के बाद डॉक्टर साहब ने इसका रामबाण इलाज इस प्रकार सुझायाः

* ख्., जनता, 21 मई, 1938