131 14.5.1938 अपने न्यायपूर्ण अधिकार पाने के लिए युवाओं को अपनी जान न्यौछावर करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए - कणकषली (कोंकण) - Page 154

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* अपने न्यायपूर्ण अधिकारों को पाने के लिए युवाओं को जान

न्योछावर करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए

पिछले साल 10 जनवरी, 1938 के दिन कोंकण के किसानों ने मुंबई के एसेंब्ली हॉल तक ‘मार्च’ करते हुए अपने संगठन के बल का जो प्रदर्शन किया उसकी यादें, मुंबईकरों के दिल में अभी ताजा होंगी। स्वतंत्र लेबर पार्टी के नेतृत्व में किसान अनुशासन पूर्ण तरीके से तथा संघ शक्ति के साथ अपना मोर्चा एसेंब्ली तक ले गए। वहाँ डॉ. अम्बेडकर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल की ओर से विधायक खेर का इंटरव्यू लिया। इस साक्षात्कार में कोंकण के किसानों ने जमींदारों की ओर से ढाए जाने वाले जुल्म-जबरदस्ती के बारे में दिल को छूने वाली घटनायें किसानों के प्रतिनिधि विधायक खेर को बताईं। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया। इस प्रकार इस मुलाकात में आश्वासनों के अलावा और कुछ नहीं हुआ था। काँग्रेस सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों पर किसानों को रत्ती भर विश्वास नहीं था। इन हालात से अपनी राह कैसे ढूंढ निकाली जाए इस पर कोंकण के परेशान हाल किसान और उनके स्थानीय नेता सोच ही रहे थे। तभी उन्हें पता चला कि पृथक मजदूर पार्टी के सम्माननीय नेता और श्रमिकों के लिए काम करने आए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर कोंकण दौरे पर आएंगे और किसानों का हाल प्रत्यक्ष देखेंगे इस खबर के मिलते ही स्थानीय नेताओं ने उनके दौरे का कार्यक्रम बनाया। और उस कार्यक्रम के अनुसार डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर अपने सहयोगी मित्र मे. भाई चित्रे, सुरेन्द्रनाथ टिपणीस, डी. वी. प्रधान आदि लोगों के साथ इस दौरे के लिए पिछले हफते कोंकण में गए थे।

कोंकण की जनसंख्या करीब 13 लाख हैं। यहाँ कुणबी, महार, मराठे आदि 8 से 10 लाख किसान जमींदारों के जुल्मों से परेशान अपना जीवन बिता रहे हैं। इसके लिए जमींदारों के जुलमी कामकाज को उजागर करने के लिए स्वतंत्र लेबर पार्टी द्वारा बनाए गए दौरे की प्रमुख और बड़ी सीमाएँ खोत के ही इलाके में ली गईं।

कणकवली की पहली बड़ी सभा

इस विभाग में लाउड स्पीकर आदि के सहारे प्रचंड जनमुदाय वाली सभाएँ पहले कभी होने की बात किसी ने सुनी नहीं थी। लेकिन कोंकण के महार आदि अस्पृश्यों की पहली प्रचंड सभा 14 मई, 1938 को कणकषली में हुई। यहाँ डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर

* ख्., जनता, शनिवार 28 मई और 4 जून, 1938