131 14.5.1938 अपने न्यायपूर्ण अधिकार पाने के लिए युवाओं को अपनी जान न्यौछावर करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए - कणकषली (कोंकण) - Page 157

136 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

होइए। आप और हम दुखी और परेशान लोग एक ही हैं। आइए हम एक होते हैं, कुछ लोगों का कहना है कि वे साम्राज्य शाही के खिलाफ नहीं है। अंग्रेज सरकार को भगा देने की मेरी बिल्कुल इच्छा नहीं। लेकिन यह सोच सही नहीं। अमीर और ब्राह्मण घर के चोर हैं। उनकी चालाकी बंद कर देनी चाहिए। हम अगर अपने पैरों पर खड़े हो जाते हैं तो यह कोई कठिन काम नहीं है। अंग्रेज पानी के जहाज में बैठ कर चले जाएंगे तो फिर बताएं उन्हें भगाना आवश्यक है या जमींदार-साहूकारों को भगाना अनिवार्य है? इन घर के चोरों से हमें लड़ना ही पड़ेगा। आप अंग्रेजों की सरकार नहीं चाहते तो बता दूं कि मैं भी अंग्रेजों की सरकार नहीं चाहता।

आज जो ब्राह्मणेतर वर्ग काँग्रेस में शामिल हो रहा है उनका नेता मेरा कहना मानते नहीं। आज उन्हें भले यह बात समझ नहीं आ रही हो लेकिन अगले पाँच वर्षों में वे इस बात को समझ ही जाएंगे और हमारी पार्टी में शामिल होंगे यह बात ध्यान में रखिए। (तालियाँ) जमींदारी की पद्धति गुलामी की है। इस पद्धति में कितना अन्याय होता है, कितने दुख भोगने पड़ते हैं यह आप जानते हैं। जमींदारी को खत्म करने के लिए काँग्रेस ने कुछ नहीं किया। इसीसे आप जान जाएंगे कि काँग्रेस किसकी है। इससे आगे काँग्रेस का विकास संभव नहीं। आज स्वतंत्र लेबर पार्टी का पौधा छोटा है लेकिन वह दिन-दुना रात-चौगुना बढ़ेगा। आप उसके छाये में बैठेंगे और ब्राह्मणेतर जनता भी उसकी छाया में आने वाली है।

इस प्रकार डॉ. अम्बेडकर का भाषण पूरा हुआ। उसके बाद परिषद् के आगे सात प्रस्ताव रखे गए और उन्हें मंजूर किया गया। वे इस प्रकार हैं-(1) मरे हुए जानवरों को ढोए नहीं, (2) महारों के दो गुटों - प्राण ओर बैल नष्ट करने के बारे में, (3) जमींदारी

खत्म करने और महारों से संबंधित बिलों का समर्थन देना।, (4) होटल अथवा उपाहार गृहों में अगर स्पृश्य हिंदुओं की तरह का व्यवहार आपके साथ न हो तो उसे बहिष्कृत करना, (5) महार सेवा संघ के और शाखाओं के निर्माण के बारे में, (6) महारों के जो काम बंद कराए गए हैं उन्हें कोई और न करें, (7) हर गाँव आठ आनों का चंदा देकर संघ का बल बढ़ाएँ।