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* बहुसंख्यक किसान और मजदूर वर्ग को देश का असल सत्ताधारी
वर्ग बनाना चाहिए
दिनांक 4 मई, 1938 को कणकवली में हुई परिषद् के बाद वहाँ से 100 मील की दूरी पर बसे देवरुख में किसानों की सभा आयोजित की गई थी। 15 मई, 1938 को डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर अपने प्रमुख नेताओं के साथ मोटर से पहुँचे। वहाँ करीब 4-5 किसान बंधु उनका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। विशेष बात थी कि इस सभा में स्पृश्य-अस्पृश्य किसानों के साथ मुसलमान किसान भाई भी उपस्थित थे।
इस सभा में भाई चित्रे, डी.वी. प्रधान, सुखा टिपणी भास्करराव कोवले, घाटगे आदि नेताओं के जोरदार भाषण हुए।
इस अवसर पर डॉ. बाबासाहेब ने अपने भाषण में बड़ी स्पष्टता के साथ बताया कि,
हमारा उद्देश्य है कि हम खेतीहर किसानों की स्थितियों में सुधार लाएं और जमींदारी बिल पारित करवाएं। किसान अपनी कानूनी लड़ाई लड़ते रहे और साथ ही अपना संगठन भी बनाते रहें। काँगे्रस अगर जमींदारी बिल पारित नहीं करे तो आगे सत्याग्रह की मुहिम छेड़ने के लिए किसान बंधु तैयार रहें। कुणबी वर्ग बड़ी संख्या में स्वतंत्र लेबर पार्टी में शामिल हों। क्योंकि यही पक्ष गरीब, मजदूर, किसानों की हित साधना के लिए समर्पित है। ठीक उल्टे, काँग्रेस साहूकार, जमींदार और सफेदपोशों की है। क्योंकि वह उन्हीं के पैसों पर पलती है। इसीलिए काँग्रेस के जरिए किसानों का भला होने की उम्मीद बिल्कुल ना पालें। सो, सभी जातियों, पंथों आदि के भेदभावों को दूर रखते हुए सभी किसान यह लड़ाई जोरदार तरीके से और संगठित होकर तथा अनुशासन का पालन करते हुए लड़े। हमारी लड़ाई सच्चे सिद्धांतों की लड़ाई है। हिन्दी राजनीतिक सत्ता सेठ-साहूकारों, ब्राह्मणों, जमींदारों, पूंजीपतियों की काँग्रेस के हाथ जाने के बजाय असली श्रमजीवियों के साथ जानी चाहिए। बहुसंख्यक किसान और मजदूर वर्ग को इस देश का सत्ताधारी वर्ग बनना चाहिए। इसी उद्देश्य के साथ हमारी स्वतंत्र लेबर पार्टी के साथ कार्य करने लगा है। ठीक 5.30 बजे ‘जय अम्बेडकर’ और ‘जमींदारी नष्ट हो’ के नारों के साथ बरखास्त हुई।
उसी दिन शाम को संगमेश्वर तहसील के अखली गांव में शाम ठीक 7 बजे हुई
* ख्., जनता, 28 मई और 4 जून, 1938