138 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सभा में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर, विधायक घाटगे और विधायक चित्रे के भाषण हुए जिसमें उन्होंने बताया कि किसान कानूनी ढंग से अपनी लड़ाई लड़ें और स्वतंत्र लेबर पार्टी के सदस्य बनें। ठीक 8 बजे सभा समाप्त हुई। उसके बाद डॉ. बाबासाहेब के साथ सभी लोग रात 9 बजे चिपलूण के डाक बंगले में पहुँचे। वहाँ नाइस्कर बंधुओं ने सभी मेहमानों को बढि़या खाना खिलाया। 16 तारीख की सुबह श्री गडकरी वकील ने मेहमानों को नाश्ता कराया। उसके बाद डॉ. बाबासाहेब के साथ सभी लोग स्वतंत्र लेबर पार्टी का दफतर देखने गए। खुद बाबासाहेब ने चिपलूण के दफतर का मुआयना किया। पूरे इंतजामों के मुआयने के बाद बाबासाहेब तथा अन्य मेहमान श्री नाईस्कर के घर दोपहर का खाना खाने गए। थोड़ी देर आराम करने के बाद 1.30 बजे सब लोग गुहागर पेठा जाने के लिए निकले। दोपहर 2.30 बजे सब लोग डाक बंगले में पहुंचे। पुलीस पाटील श्री आसगोलकर ने मेहमानों को डाब का पानी पिलाया और आम खिलाए। थोड़ी देर आराम करने के पश्चात् बाबासाहेब और अन्य मेहमान ठीक 3.30 बजे सभा स्थान पहुँचे। सभा में विधायक घाटगे, भाई कोवले, भाई टिपणीस के भाषण हुए। डॉ. बाबासाहेब ने अपने भाषण में बताया कि किसानों को अपनी गरीबी से छुटकारा पाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी किसान संगठित होकर अत्याचारी जमींदारी पद्धति को उखाड़ कर फेंकें। तभी उनकी दीन-हीन स्थितियों में बदलाव आ सकता है यह बता कर काँग्रेस जमींदारी बिल अगर पारित नहीं करती है तो आगे की लड़ाई कैसे लड़नी है यह डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने बताया ‘अम्बेडकर की जय’ और ‘जमींदार पद्धति खत्म करो’ के नारे लगाते हुए सभा खत्म हुई। उसके बाद बाबासाहेब तथा अन्य मेहमान गुहगर पेठ के श्री खोत के घर नहाने के लिए रूके। कुछ देर सुस्ताने के बाद शाम 6 बजे गुहागर से चले तो 7-30 बजे सीधे चिपलूण के सभा मंडप में पहुँचे। वहाँ पहले श्री भाई कोवले का भाषण हुआ। उसके बाद विधायक घाटगे ने किसान भाइयों को बताया कि डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा किसानों की खातिर दौरे पर निकलना कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने किसानों को बताया कि इसीलिए वे उनकी सभा में अब से अधिक संख्या में उपस्थित रहें। साथ ही सब स्वतंत्र लेबर पार्टी के झंडे तले एकजुट होकर जमींदारी पद्धति नष्ट करने में डॉ बाबासाहेब की मदद करें। दूसरे दिन सुबह चाय पीने के बाद सब लोग 8 बजे चिपलूण से चले। रास्ते में परशुराम मंदिर देखने के लिए लोग रुके। मंदिर देखने के बाद मंदिर के ट्रस्टी के घर डॉक्टर साहब और अन्य मेहमानों ने चाय तथा नाश्ता लिया। रात 9.30 बजे परशुराम से निकल कर सीधे खेड के डाक बंगले में सब लोग पहुँचे। श्री जाधव ने मेहमानों को चाय और अल्पाहार दिया। वहाँ डॉक्टर साहब और मेहमानों ने 2 बजे तक आराम किया। फिर सब खेड़ के समामंडप में पहुँचे। पहले तहसील सचिव श्री खांबे और विधायक घाटगे ने भाषण की शुरूआत की। उन्होंने संक्षेप में अपने भाषण में बताया कि किसानों को कानूनी तौर-तरीकों से ही अपनी लड़ाई लड़नी चाहिए और