132 15.5.1938 बहुसंख्यक किसान और मजदूर वर्ग को देश का असली सत्ताधारी वर्ग बनना चाहिए - देवरुख (रत्नागिरी) - Page 160

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डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के नेतृत्व में लड़ाई की शुरूआत कर उसमें सफलता प्राप्त कर लेनी चाहिए। उसके बाद डॉ. बाबासाहेब बोले। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि किसान एकजुट हों और पक्ष की ताकत बढाएँ। जमींदारी का बिल अगर पारित नहीं किया गया ता क्या करना चाहिए इस बारे में संक्षेप में किसानों को निर्देश दिए। उन्होंने यह भी बताया कि किसान अपनी लड़ाई न्यायपूर्ण तरीके से और सही कानूनी ढंग से लड़ें। क्योंकि किसी और तरीके से लड़ कर सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने बताया कि पृथक मजदूर पक्ष में पूरा भरोसा रखें। यही पक्ष आप सभी किसानों का और गरीब जनता का हित करेगा। अन्य किसी पक्ष पर भरोसा ना करें। उनके बाद श्री चित्रे श्री टिपणीस और श्री प्रधान के भाषण हुए। उन्होंने भी अपने भाषणों में यही उपदेश दिया कि किसान संगठित बनें और डॉ. बाबासाहेब की नेतृत्व में किसान अपनी लड़ाई लड़ें और स्वतंत्र लेबर पार्टी क सदस्य बनें। उसके बाद सभा समाप्त हुई। बाबासाहेब और अन्य मेहमान उसके बाद खेड से दापोली के लिए निकले। रास्ते में विधायक घाटगे के गांव फुरुस’ पहुँचे। वहाँ सूबेदार घाटगे, गांव के मुखिया, स्काउट तथा गाँव के कुछ प्रमुख जमींदार डॉ. बाबासाहेब के स्वागत के लिए आगे आए। उनके साथ तथा ‘अम्बेडकर जिंदाबाद’ क नारों के साथ सब फुरुसों में महारों की बस्ती में खाना खाने पहुँचे। वहाँ सूबेदार घाटगे, पेन्शनर गणपत सोनू गमरे आदि वृद्ध नेताओं ने मेहमानों की खास आवभगत की। खाना खाने के बाद डॉ. बाबासाहेब और अन्य मेहमान फुरुस गाँव के अखाड़े में मर्दानी खेल देखने गए। बाद में स्काऊट के साथ बाबासाहेब सड़क तक चल कर गए। डॉ. बाबासाहेब की जयकार तथा ‘जमींदारी खत्म हो’ आदि नारों के कारण फुरुस गांव के मुसलमान जमींदार डर गए। कई जमींदार छिप कर बाबासाहब के दर्शन कर रहे थे। स्काऊट और अखाड़े का श्री भी. गो. घाटगे और माधव राव फुरीसकर और गमरे आदि ने बेहतर प्रबंधन किया था। डॉ. बाबासाहेब के इस दौरे में पहली बार फुरुस में सूबेदारिन श्रीमती लक्ष्मीबाई घाटगे, श्रीमती गंगूबाई गमरे और श्रीमती मुक्नाबाई घाटगे ने आरती उतारी। सुश्री मुक्ताबाई घाटगे द्वारा सुस्वर में मंगलगीत गाया गया। 5.30 बजे अन्य मेहमानों ने साथ डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर फुरसा गांव से निकले। उस वक्त सूबेदार घाटगे और पेन्शनर गणपत गमरे ने सबको विदाई दी। दापोली में कालकाईचा कोड में डॉ. बाबासाहेब तथा अन्य मेहमानों का रुकने का प्रबंध किया हुआ था। वहाँ चाय पीने के बाद अध्यक्ष तथा अन्य मेहमान 8 बजे सभास्थल पहुँचे।

दापोली की सार्वजनिक सभा

सभा की शुरूआत हुई पहले सचिव श्री खांबे ने संक्षेप में डॉ. बाबासाहेब के दौरे के बारे में जानकारी दी। डॉ. बाबासाहेब भाषण देने के लिए उठ कर खड़े हुए लेकिन पिछली सभा में दिए गए भाषण के कारण उनका गला बैठ गया था। कोशिश के बावजूद