140 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
वह बोल नहीं पाए। आखिर उन्होंने उतना ही बताया कि मुझे जो भी कहना था आज वह भाई चित्रे के मुंह से आज आप सुनिए। श्री चित्रे ने दौरे के बारे में पूरी जानकारी देकर इस दौरे का डॉ. बाबासाहेब के स्वास्थ्य पर कितना बुरा असर हुआ है यह बताया। डॉ. बाबासाहेब किसानों को जो बताना चाहते थे वह भाई चित्रे ने किसानों का अच्छी तरह समझाया। जमींदारों के जुल्मों को तब तक सहनशीलतापूर्वक सहना ही होगा जब तक जमींदारी का बिल पास नहीं होता। क्योंकि आज काँग्रेस सरकार, अधिकारी, कोर्ट-कचहरी सब जमींदारों, सेठ-साहूकारों की तरफ है। हमें इसी प्रकार अपनी लड़ाई लगातार, एकजुट होकर जारी रखनी होगी। जरूरत पड़े तो प्राण लगाने से भी पीछे नहीं हटना होगा। अगर इससे भी काम नहीं चलता तो काँग्रेस की ही तरह हमें अपना अधिकार साबित करने के लिए कारागार भी जाना होगा। बरसात के मौसम के बाद जमींदारी के बिल के बारे में जो निर्णय होगा उसी पर अगली लड़ाई निर्भर करेगी। सो फिलहाल बिना निराश हुए एका और सहनशीलता को कायम रखते हुए लड़ाई जारी रखनी होगी। भाई चित्रे के भाषण के बाद भाई टिपणीस, प्रधान, चिटणीस और कोवले के जोरदार भाषण हुए। आखिर में विधायक घाटगे ने अपनी जिम्मेदारी समझ कर दौरा पूरा किया। सभी स्थानीय नेता और कार्यर्त्ताओं ने उनकी मदद की। इसके लिए पृथक मजदूर पक्ष की ओर से भाई चित्रे ने सबको धन्यवाद दिया। डॉ. बाबासाहेब और अन्य मेहमानों द्वारा अपना अमूल्य समय इस दौरे के लिए दिया, इस इलाके का दौरा किया इसके लिए उनके प्रति आभार प्रकट किए और डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को फूलमाला अपर्ण की।
इन सभी सभाओं में कुलवाडी, महार, मुसलमान आदि 10 से 15 हजार को सभी जातियों, धर्मों के किसान बंधु प्रेम, उत्सुकता, आस्था के साथ और एकजुट होकर उपस्थित रहे। हर सभा में 20-20, 25-25 मीलों की दूरी से किसान आए हुए थे।