142 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
नहीं हूँ लेकिन मेरा अब तक का जीवन बिल्कुल निर्मल है और जो-जो मुझे आपके हित में लगा वह सब मैं करता आया हूँ और करता हूँ।
चुनाव के समय काँग्रेस ने जो वचन दिए थे उनमें से कौन से वचन उसने निभाए हैं? अब तक काँग्रेस द्वारा जो बिल पास किए गए हैं उनमें किसानों के हित की कितनी बातें हैं? उल्टे, जमींदारी बिल जैसा महत्वपूर्ण बिल पिछले 10 महीनों से काँग्रेस टालती रही है और चुनाव के दौरान किए गए अपने वादे पर कालिख पोत रही है। क्या आपको लगता है कि आज अगर मैं काँग्रेस में जाऊं तो वहाँ मुझे योग्य स्थान नहीं मिलेगा, या वहाँ मेरी प्रतिष्ठा बरकरार नहीं रहगी? अगर मैं काँग्रस में जाऊं- तो वहाँ भी अपनी बुद्धि के बल पर अपनी छाप जरूर छोडूंगा और सम्मान का स्थान प्राप्त करूंगा। मुझे इस बात का पूरा यकीन है। गाँधी की जान किसने बचाई है? मैंने बचाई! लेकिन गांधी की काँग्रेस गरीबों के कल्याण के लिए नहीं है ऐसी मेरी पक्की धारणा होने के सुभाषचंद्र बोस पं. जवाहरलाल नहरू भी झुके लेकिन मुझ पर गांधी का कभी प्रभाव नहीं पड़ा। आज तक काँग्रेस ब्राह्मणों और सेठों के रुपयों पर पली है इसलिए उन्हीं की ‘दासी’ बन कर रह गई है। जो जिसका अनाज
खाता है वह उससे उपकृत रहता है। फिर आप ही बताइए, सेठ-साहूकारों के पैसों पर पली काँग्रेस उनके खिलाफ कैसे जाएगी? आज तक ‘भट-भिक्षु’ लोगों ने आपके लिए क्या किया है? आप लोगों ने भी उनके घर के जूठे बर्तन धोने, कपड़े खंगाल कर साफ करने के अलावा क्या किया है? आज सरकारी नौकरियों में कौन लोग हैं? आज कहीं भी जाइए, जज, मामलतदार, मुंसिफ, कलक्टर आदि सब उन्हीं के सगे-संबंधी हैं। आज आपकी संख्या अधिक होने के बावजूद सरकारी नौकरियों में आपके लोगों की संख्या इतनी कम है तो यह क्या दर्शाता है? आपमें से किसी को इस देश का प्रधानमंत्री बना हुआ मैं देखना चाहता हूँ। मुट्ठी भर सफेदपोशों का नहीं मैं आप 80 प्रतिशत लोगों का राज चाहता हूँ।
जमींदारों के जुल्मों के कारण आप भीरू और डरपोक बन गए हैं। जमींदार ने आँख उठा कर आपकी और देखा तो आप कांपने लगते हैं। लेकिन अब आपको अपना यह डर त्यागना होगा। वह छेड़े तो उसको करारा जवाब देना आपको आना चाहिए। वह अगर आपको लाठी मारें तो आपकी भी लाठी उठाने की हिम्मत होनी चाहिए। हर व्यक्ति को स्वसुरक्षा का अधिकार कानूनन प्राप्त है। बैरिस्टर के नाते मैं उसकी पुष्टि कर रहा हूँ। इन सभी बातों पर आपको खुद ही अमल करना है। क्योंकि हरेक की मदद के लिए हम पुलिस-सिपाही नहीं दे सकते। आज आप सब लोगों को साथ मिलकर जमींदारी को खत्म करना हैं। सभी काश्तकारों को यही मानना होगा कि हमारी जाति एक ही है। जमींदार अगर महार काश्तकार की जमीन छीनता है तो कुलवाड़ी या मुसलमान को चाहिए कि वे उस जमीन को कसने से इंकार कर दे। इसी प्रकार कुलवाड़ी की जमीन छिन जाए तो महार और मुसलमान उस जमीन को कसने से इंकार करें और मुसलमान की जमीन अगर छीन ली जाए तो महार और कुलवाड़ी छीनी गई ना कसें। आज जमींदार आप पर जुल्म कर रहे हैं, लेकिन याद रखें कि यह हाथ-पैर मारने की उनकी आखिरी कोशिशें हैं। मरते समय आदमी ज्यादा हाथ-पैर