134 20.5.1938 जमींदारी खत्म करने का बीड़ा मैंने उठाया है - महाड - Page 165

144 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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* जमींदार खत्म करने का बीड़ा मैंने उठाया है

रत्नागिरी जिले में आयोजित कार्यक्रम होने के बाद 18 मई, 1938 को डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर आराम करने के लिए महाड में आए। 20 मई, 1938 को रात 9 बजे यहाँ के मशहूर गाड़ीतल में सार्वजनिक सभा हुई थी। करीब 10000 किसान बड़े उत्साह के साथ वहाँ आए थे। सभी विरोधी पक्ष के लोग भी आए हुए थे। अस्पृश्यों से अधिक स्पृश्य किसान ही शायद ज्यादा उपस्थित थे। सेठ, साहूकार, जमींदार आदि पूंजीपती लोग डरे-डरे आस-पास खड़े रह कर देख रहे थे। स्वयं-सेवकों की कतारों के बीच से होते हुए ठीक 9 बजे डॉ. बाबासाहेब सभास्थली पहुंचे। पहले श्री नानासाहब टिपणीस ने कुलाबा जिले में स्वतंत्र लेबर पार्टी ने किसानों के लिए क्या किया इसका विस्तृत वर्णन किया। मुर्शी चांढोरे जैसे गांवों के जमींदारों द्वारा किसानों पर ढाए जा रहे जुलमों को दूर करने का श्रेय पृथक मजूर पक्ष को ही है यह जानकारी उन्होंने दी। उसके बाद तालियों की गड़गड़ाहट के बीच डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर बोलने के लिए उठकर खड़े हुए। मुंबई प्रांत की काँग्रेस की राजनीति और जमींदारी बिल इन दो विषयों पर करीब डेढ़ घंटों तक डॉक्टर साहब का जोरदार भाषण हुआ।

उन्होंने अपने भाषण में कहा-

चुनाव से पहले काँग्रेस ने किसानों को कई मीठे आश्वासन देकर उनके मत हासिल किए। सत्ता स्वीकारने के बाद काँग्रेस द्वारा पिछले ग्यारह महीनों में लोगों के हित का कोई काम नहीं किया गया है। उपाधीदान विरोध, लोकल बोर्ड जैसे गैर-जरूरी और अनुपयोगी बिल पास करने में काँग्रेस मंत्रीमंडल ने समय बिता कर लोगों को झांसा दिया है। हाँ, किसानों के जुलूस से डर कर काँग्रेस ने किसानों की जमीन बेचने पर पाबंदी लगाने वाला बिल पास किया। हालांकि उसमें भी कोई खास दम नहीं था। स्वतंत्र लेबर पार्टी द्वारा किसानों के हित की प्रस्तुत की गई कई उप-सूचनाएँ नामंजूर कीं। बड़ी मुश्किल से खेती में जरूरी दो बैलों को जब्त न किए जाने की उप सूचना उन्होंने मान ली। इस प्रकार काँग्रेस ने किसानों को ठगा है। सेठ -साहूकारों के पैसों से चुनाव जीतने वाली काँग्रेस सरकार अपने अन्नदाता के खिलाफ कानून बनाकर भी किसानों का हित नहीं कर सकती यह बात ध्यान में रखें।

जमींदारी को खत्म करने का बीड़ा मैंने उठाया है। कहा नहीं जा सकता कि काँग्रेस

* ख्., जनता, 4 जून, 1938