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वाले लोगों का मनोरंजन कर रहे थे। पचगणी का समता सैनिक दल अपनी वर्दी में हा जिर था। परिषद् के आयोजकों को प्रचार-कार्य के लिए केवल एक दिन मिला था फिर भी दो हजार के करीब वहाँ लोग पहुँच चुके थे। शामियाने के दरवाजे पर महिलाओं ने डॉ. बाबासाहेब की आरती उतारी फिर उन्हें फूलमालाएँ अपर्ण कीं। समता सैनिक दल और बैंड ने उन्हें सलामी दी। अम्बेडकर जयकार की ध्वनि से वातावरण गूंज रहा था। इस तरह के ठाठ के साथ अन्य मेहमानों के साथ डॉ. बाबासाहेब मंच पर विराजमान हुए। तालियों की गड़गड़ाहट-सी हुई। इसके बाद स्वागताध्यक्ष श्री बंदिसाडे और भाई अनंतराव चित्रे के भाषण हुए।
डॉ. बाबासाहेब ने अपने भाषण में कहा,
पिछल नौ दिनों से मैं लगातार दौरे पर हूँ। रात दो बजे तक मैंने महाड में भाषण दिया है और तड़के उठकर पांचगणी तक की यात्रा की है। इसलिए अब यहाँ भाषण देने की ताकत मुझमें बची नहीं है। आप सबने मेरा जो सम्मान किया है उसके लिए मैं आपके प्रति ऋणी हूँ। आपकी इच्छा है कि मैं कुछ बोलूँ। लेकिन क्या करूँ, इस बार मुझे आपको निराश करना पड़ रहा है। उम्मीद है कि इसके लिए आप मुझसे नाराज नहीं होंगे। फिर कभी जब इस तरफ आना होगा तथा जो कुछ मुझे आपसे कहना है वह मैं कहूँगा। आज बस इतना ही कहता हूँ कि सौभाग्य से यहाँ स्वतंत्र लेबर पार्टी की स्थापना हो चुकी है। आप सब लोग उसके सदस्य बनें। अपनी पार्टी की ताकत बढ़ाएँ और मैं कुछ कह नहीं पा रहा हूँ इसलिए आपसे माफी मांगते हुए मैं आपसे विदा लेता हूँ।