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बनाना केवल स्वार्थ साधना है। धर्मशाला के लिए 150 रुपए दिए गए। तब वाडे गुट ने सुनाया कि आप अगर दो सौ रुपए देंगे तभी हम आपको वोट देंगे। इससे वाडे गुट के लोग कितने नीच हैं इसका पता चलता है। जिला बोर्ड में किसी ढेले को खड़ा कर उसके सम्मान के लिए मुआवजा मांगने वाले समाज के नुकसान के लिए कैसे जिम्मेदार होते हैं यह आप ही तय करें। सो ऐसे लोगों से तालुक न रखने में ही समझदारी है। भले वे अपने वोटों के जरिए किसी पत्थर को क्यों न चुनाव जिता दें, आगे उसका मुझसे ताल्लुक रहेगा यह बात वह ध्यान में रखें। इसीलिए स्वतंत्र लेबर पार्टी की ओर से खड़े उम्मीदवार श्री केशव राणूजी शिशुपाल और महादेव बालाजी कोकणे को ही अपना वोट देकर चुनाव जिता दीजिए। मैं आपका शुक्रगुजार रहूँगा। आज की काँग्रेस सरकार मुंबई विधानमंडल के अल्पसंख्यक समूहों के बारे में जरा भ्ी फिकर नहीं करती। केवल बहुमत के आधार पर वह मनमानी कर रही है। इससे किसान, कामगार और मजदूर लोगों की ही हानि होने वाली है। महारवतन बिल को जानकारी दिए जाने के बाद इस बिल को परिषद् ने समग्र रूप से समर्थन दिया। सबके समर्थन से प्रस्ताव पारित हुआ। पुणे जिले में बोर्डिंग खोले जाएँ और पुणे के सभी लोग ऐसे बोर्डिंग खोलने की कोशिश करें इस आशय का प्रस्ताव पारित किया गया। जीवदया संस्था को समर्थन देने की बात कह कर उन्होंने अपना भाषण पूरा किया।
जीवदया संस्था की ओर से औ. न. निजामुद्दीन साहब ने जीवदया संस्था का समर्थन करने के लिए डॉ. बाबासाहेब के प्रति हार्दिक धन्यवाद प्रकट किए। हर साल चार आने देकर पृथक मजदूर पार्टी के सदस्य बनने की बात भी तय हुई। आखिर करंदीकर मास्टर द्वारा धन्यवाद दिए जाने के बाद सभा समाप्त हुई। डॉ. बाबासाहेब को गुलदस्ता और फूलमालाएँ अपर्ण की गईं। करीब 6 बजे के आसपास डॉ. बाबासाहेब तथा अन्य लोग पुणे को रवाना हुए।