137 17.6.1938 ब्रह्ममदेव भी चाहें तो हमारी राजनीतिक उन्नति रोक नहीं सकते - धुले - Page 171

150 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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* ब्रह्मदेव भी अगर चाहें तो हमारी राजनीतिक उन्नति रोक नहीं

सकते

अदालत के काम के सिलसिले में 17 जून, 1938 को डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर सुबह की गाड़ी से धुले आए। स्टेशन पर कई महत्वपूर्ण लोग उपस्थित थे। स्काऊट के जत्थों ने बाबासाहेब को सलामी दी। दोपहर के समय कोर्ट में भीड़ उमड़ी थी। कामकाज पूरा होने के बाद वकीलों की विनती का सम्मान करते हुए बाबासाहेब बार लाइब्रेरी में गए। वहाँ काकासाहब बर्वे की ओर से किया गया चायपान का आयोजन संपन्न हुआ। शाम को बाबासाहेब राजवाडे अनुसंधान मंदिर गए। वहाँ वकील तात्यासाहब भट, वकील भाऊराव कुलकर्णी, वकील काकासाहब बर्वे, रा. उपाध्ये, खरटमल, श्री जाधव, बोराले आदि लोग उपस्थित थे। काफी विचार-विमर्श के बाद खुद पाठक शास्त्री वहाँ उपस्थित हुए। भट वकील और शास्त्री बुवा ने जानकारी मुहैय्या कराने का वचन देकर अभिनंदनीय काम किया।

रात करीब आठ बजे म्यु. स्कूल नं. 8 के प्रांगण में सभा हुई। सभा के लिए 5-6 हजार लोग आए थे। प्राण यज्ञ दल संस्था के लोग अपनी लाल रंग की वर्दी पहन कर, उपस्थित थे। काफी महिलाएं भी वहाँ उपस्थित थीं। डॉ. बाबासाहेब और श्री जाधव आदि लोगों के आते ही तालियों की आवाज गूंज उठी। डॉ. बाबासाहेब के नाम की जयकार से सभास्थान गूंज उठा।। पहले श्री यशवंत राव चिंतामण गायकवाड, श्रीमती कृष्णाबाई आहिरे, गोजाबाई बगले, अहिल्याबाई देवराव, सुश्री सावित्रीबाई सांवत, श्रीमती आनंदीबाई जाधव आदि के स्फूर्तिदायी भाषण हुए। इन लोगों के भाषणों के बाद पश्चिम खानदेश के युवा, उत्साही भावी नेता श्री पुंडलिकराव तुकाराम बोराले का भाषण हुआ। इन लोगों के भाषणों के बाद विभिन्न संघों की ओर से और सुशिक्षित महार महिला और पुरुषों की ओर से डॉ. बाबासाहेब को करीब 40 फूलमालाएँ और गुलदस्ते अपर्ण किए गए। उसके बाद तालियों की गड़गड़ाहट के बीच डॉ. बाबासाहेब भाषण के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा,

प्रिय बहनों और भाइयों,

इस ओर लंबे समय से मेरा आना नहीं हुआ था मध्य प्रांत, संयुक्त प्रांत पंजाब आदि कई जिलों से मेरे पास कई लोगों के खत आए हैं। बल्कि, पूरे हिंदुस्तान से मुझे बुलावे

* ख्., जनता, 2 और 30 मई, 1938