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के खत आए हैं कहूं तो अत्युक्ति नहीं होगी। यह देश कितना विशाल है। एक आदमी काम का कितना बोझ ढोए? दूसरी बात, आजकल मेरी सेहत ठीक नहीं रहती। पिछले दो महीनों में मेरा वजन 38 पौंड कम हुआ है। इसके बावजूद अन्य हिस्सों की तुलना में इस ओर थोड़ी उपेक्षा हुई है। इस वक्त मैं केवल आश्वासन दे सकता हूँ कि कभी न कभी मैं इसकी भरपाई अवश्य करूंगा।
पिछले दस सालों से राजनीति और समाजनीति जिस ओर उन्मुख है उससे यह सोच कर मुझे डर लगता है कि पता नहीं देश किस हद तक और गिरेगा? हालांकि एक बात सही है कि राजनीतिक मामलों में डर पालने की जरूरत नहीं है। झांक कर भी जिनके साए से लोग बचते थे उन्हीं में से 15 लोग आज एसेंब्ली में बैठकर अधिकार और हक के साथ अपनी शिकायतें बयान कर सकते हैं। आज मुंबई के विधिमंडल में काँग्रेस जैसी प्रबल, मजबूत संस्था है। इतनी बड़ी संस्था को स्वतंत्र लेबर पार्टी से डर लगता है। (तालियाँ) अस्पृश्य समाज के लिए यह कोई छोटी बात नहीं है। आज काँग्रेस में लाखों रुपये खर्च करने वाले साहूकार हैं। शिक्षा में परंगत ब्राह्मणों की भरमार है। 40 सालों का इतिहास है। स्वतंत्र लेबर पार्टी की स्थापना केवल एक साल पहले हुई है। साल भर में ही यह पक्ष इतना बड़ा हो चुका है। इसने इतना काम किया कि स्वतंत्र लेबर पार्टी का नाम पता न हो ऐसा व्यक्ति पुरुष या महिला नहीं मिलेगा। लेकिन राजनीति की ये विचित्र स्थिति है कि अन्य पक्षों को अब इससे डर लगने लगा है। जिन मराठा और कुणबी लोगों को हमसे मांगने में शर्म आती थी वे खुले आम हमारे टिकट पर चुनावों में उतर रहे हैं। आज स्वतंत्र लेबर पार्टी में कायस्थ, मराठा आदि लोग भी शामिल हैं यह असल में हिंदुस्तान के इतिहास की अपूर्व घटना है। अब ब्रह्मदेव भले आड़े आए, राजनीति में हमारी प्रगति की राह में कोई रोड़े नहीं अटका सकता। (तालियाँ) यह कोई पोखर, तालाब नहीं यह तो विशाल नदी है जिसका नाम है सिंधु। बांध भी बनाया जाए तो वह भी टूट जाएगा। राजनीति के अधिकार पाने में कोई अड़चन नहीं आएगी। 15 लोगों ने वहाँ जाकर हमारे लिए क्या किया यह आज बताना मुश्किल है। पिछले 2000 सालों से रूढि़याँ हमारी गर्दन पर सवार हैं। उन्हें खत्म करने के लिए केवल 10-20 सालों का समय कम पड़ेगा, बल्कि 10-20 वर्षों में उनके जड़ समेत खत्म किए जाने की उम्मीद करना अन्यायकारी होगा। एकता और संगठन जितना अधिक होगा राजनीति में प्रगति उतनी ही जल्दी होती है इस मामले में मुझे अपने समाज पर गर्व है। चुनाव के समय जो ईमानदारी, धैर्य और संगठन दिखाया उतना धैर्य, ईमानदारी और उतनी एकजुटता इस प्रांत में अन्य किसी संगठन ने नहीं दिखाई। आपने तब यह नहीं सोचा कि हम दुख से, दरिद्रता से ग्रस्त हैं। जिसका पेट खाली होता है, साहूकार जितना उधार देगा वही
खाकर जिन्हें गुजारा करना पड़ता है उनकी ओर से दिखाया गया साहस प्रशंसनीय है। हम आप गांवों में बिखर कर रहे हैं। गांवों में हमारे बस 5-25 घर होते हैं। औरों के