152 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
100 से अधिक घर होते हैं। अगर वे तय करें और हमसे कहें, फलां चीज करें वरना हम आपकी बस्ती उखाड़ कर आपको भगा देंगे’, तो ठीक वही कर भी सकते थे क्योंकि हमारी हालत बेहद कमजोर थी।
इसीलिए, हमारे लोगों को एकजुट होकर स्वतंत्र लेबर पार्टी को ताकतवर बनाना होगा। पक्ष के कहे के खिलाफ कुछ नहीं किया जाए। इसी में समाज का और आपका अपना फायदा है। बताने में मुझे बहुत खुशी महसूस हो रही है कि काँग्रेस के नेता श्री बल्लभभाई पटेल ने हमारे अनुशासन का वर्णन करते हुए कहा है, ‘‘संगठन हो तो डॉ. अम्बेडकर के संगठन की तरह।’’ (तालियाँ) आप इस संगठन को छूटने ना दें। हौज भर दूध नमक की एक डली से फट जाता है। घड़ा भर अमृत जहर की एक बूंद भर से विषमय बन जाता है। उसी प्रकार स्वार्थी सिद्ध करने के लिए तैयार रहते है। उनकी सोच ही स्वार्थी होती है। हमेशा यही समय बना रहेगा ऐसा नहीं है, स्वार्थी दुर्गुणों से भरे लोग भी आएंगे। अनाज बीनते हुए हम कंकड़ों को चुन कर फेंक देते हैं, उसी तरह कंकड समान स्वार्थी लोगों को कंकड की तरह ही बीन कर अलग कर देना चाहिए। (तालियाँ) कम से कम महार जाती में कोई आदमी स्वतंत्र लेबर के खिलाफ ना हो। राजनीति में संगठन और संघ शक्ति के बगैर कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। संघ शक्ति के निर्माण के लिए पैसा चाहिए। घर चलाने के लिए पैसा चाहिए नोन-मिर्च के लिए पैसा चाहिए। बिना पैसों के काम नहीं चलता। इसी तरह सार्वजनिक कामों के लिए पैसे की जरूरत है। काँग्रेस के पास राजनीति के लिए जरूरी पैसा है। मुझे पता चला है कि हाल ही में हुए डिस्ट्रिक्ट लोकल इलेक्शन में काँग्रेस के एक उम्मीदवार ने 3000 रु. खर्च कर जीत हासिल की। रुपयों के बगैर राजनीति की गाड़ी चलाई नहीं जा सकती। दूसरों के भरोसे चलने के बजाय हमें अपने पैरों पर खड़े रहना होगा। इस संदर्भ में मैं आपको महाभारत की एक कहानी की याद दिलाना चाहता हूँ। भीष्म और द्रोण कौरवों की तरफ थे। कौरव का साथ देना असत्य का साथ देना है और पांडवों का साथ देना सत्य का साथ देना है यह वे जानते थे। कौरवों ने पांडवों से कहा था, ‘‘राज्य की बात तो दूर, हम सुई की नोक बराबर मिट्टी भी हम आपको नहीं देंगे।’’ सही या गलत जाने बगैर भीष्म और द्रोण कौरवों की तरफ से लड़े। उनसे जब पूछा गया कि वे सत्य के साथी पांडवों की ओर से क्यों नहीं लड़े तो उन्होंने बताया था कि हम कौरवों का अन्न खाते हैं, इसलिए।
जो औरों की मदद के सहारे जीता है वह उनका गुलाम होने से बच नहीं सकता। काँग्रेस के हरिजन सेवक फंड से मैंने पैसा नहीं लिया। उनसे अगर मैं 8-10 लाख रुपये लेता तो उनका गुलाम बन कर रहता। आपके लिए तब मैं कुछ कर नहीं पाता। उनके हजारों रुपयों से आपके चार आने मेरे लिए लाख रुपयों के बराबर हैं। (तालियाँ) अपनी गृहस्थी आप अपने सिर लीजिए। इसमें आप ही का फायदा है। हमें काँग्रेस का पैसा