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नहीं चाहिए। काँग्रेस के प्रचारकर्ता हर महीने 30-40 रुपये लेकर काम करते हैं। हमारे सेवक हर महीने 10 रुपए लेकर काम करने के लिए तैयार मिलेंगे। स्वतंत्र लेबर पार्टी आपका है। आपको ही उसे मजबूत करना होगा।
मैं 20 वर्ष की उम्र में बी.ए. हुआ। हर माह 2000 रुपए देने वाली नौकरियों के बुलावे मेरे नाम आने लगे हैं। मेरे साथ के लड़के जिला न्यायाधीश हैं। राजनीति में मेरा क्या फायदा है? मैं मोटर में घूमता हूँ। बैरिस्टर बनने के क्या फायदे हैं? आप गरीब हैं! आपकी शिकायतें नहीं आएंगी मेरे पास। स्पृश्य लोगों के टंटे ही मेरे पास आते हैं क्योंकि वे धनवान लोग हैं। मुझे धन मिलने की संभावना भी उन्हीं लोगों से है। लेकिन मैं आपके फायदे के लिए उनसे लड़ता हूँ। इसीलिए उन्हें मुझसे डर लगता है।
मेरे पीछे कौन लोग कितनी जिम्मेदारी से काम करेंगे? कौन मेरी जिम्मेदारी लेगा? मुझे उम्मीद है कि कुछ जिम्मेदार युवा आगे आएंगे और इस जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठाएंगे। वरना हमारी हालत उस बैलगाड़ी की तरह होगी जो चढ़ान चढ़ कर चोटी पर पहुंचने के बाद बैला के अभाव में फिसल जाती है। मुझे इस बात का बहुत डर लगता है। आज हम पर्वत की तलहटी से चोटी पर पहुंचने के लिए चढ़ान चढ़ रहे हैं। हम अभी अपने लक्ष्य तक पहुंचते नहीं है। यात्रा के लिए निकले हैं लेकिन अभी भगवान के दर्शन नहीं किए हैं। यात्रा पूरी होने तक हमें साथ में आटा, नोन, मिर्च आदि सब साथ ही लेकर चलना होगा। आज मुझे राजनीति से डर नहीं लगता। लेकिन राजनीति के धूमधड़क्के में जिस विषय पर हमें ध्यान देना था वह पीछे छूट गया है। हमारे अपने दुष्कृत्यों के कारण आज हमारी हालत जानवरों से बदतर हुई है। क्योंकि आप लोग गांव वालों से रोटियों के टुकड़े मांग कर खाते हो, मरे हुए जानवरों को फाड़ कर उनका मांस
खाते हो। आज राजनीति में चले आए तो क्या फायदा? मंदिर को बाहर ही से सजाने से क्या लाभ? आपने मरे जानवर का मांस खाना छोड़ दिया तो कौन खाएगा? मरा हुआ जानवर कुत्ते या गिद्ध खाएंगे। वही काम अगर आप भी करो तो फिर आपकी औकात क्या होगी? यह कहते हुए आपको शर्मिंदगी कैसे महसूस नहीं होती? मान लीजिए कल जाधव अगर मुख्यमंत्री हुआ, और यह असंभव बात तो नहीं है - तब अस्पृश्य लोग उसका कैसे सम्मान करेंगे? आज की तरह क्या उनकी आरती उतारी जाएगी? जो जीवन आप आज व्यतीत कर रहे हैं उसे आपको बंद करना होगा। सफाई के साथ, सलाहियत से रहना होगा।
कुछ लोग मुझसे पूछते हैं कि आप अगर हमारा मृत मांस खाना बंद करवा देंगे तो हम खाएंगे क्या? मैं उनसे यह कहना चाहता हूँ कि मान लीजिए पड़ोस वाले चित्तौड़ गांव की दो लड़कियाँ अगर अपना गांव छोड़ कर बंबई गइंर्, और उनमें से एक अगर गृहस्थी के बजाय वेश्या व्यवसाय करने लगे तो उसे पलंग, तकिए, गद्दे, कुर्सियाँ, टेबल आदि मिला। एक नौकर भी है। इरानी की दुकान से वह मस्का-स्लाइस, कीमा, रोटी