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* औरों का मुँह ताकने वालों का काम अधूरा रह जाता है
17 जून, 1938 को सुबह 5 बजे डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर जब चालीसगांव स्टेशन पर ट्रेन से उतरे तब उनके स्वागत के लिए वहाँ बहुत बड़ा जनसमुदाय इक्ट्ठा हुआ था। लगातार बाबासाहेब की जयकार के नारे लगाए जा रहे थे। डॉ. बाबासाहेब के गाड़ी से उतरते ही अस्पृश्योद्धारक बोर्डिंग के सचिव श्री डी.एम. मागडे ने बोर्डिंग की तरफ से हार अर्पण किया। उसके बाद डॉ. बाबासाहेब धुले जाने के लिए गाड़ी में बैठे महिलाओं की ओर से कु. शांताबाई दिवाण चव्हाण ने और पिंपरखेड की क्रेडिट सोसाइटी की ओर से सोमा संसारे ने हार अर्पण किए। स्टेशन पर मे. डी. जी. जाधव, बी. एएमएल. ए., शामराव कामाजी जाधव, डिस्ट्रिक्ट लोकल बोर्ड मेंबर, जलगांव, श्रावण धर्मजी जाधव, म्युनिसिपल, काउंसिलर, चालीसगांव, दिवाण सीताराम चव्हाण, धावजी पहलवान, भापु मुकादम, डबाले, आडंगले, तात्याबा पवार, श्रीपत पवार, सीताराम आव्हाड आदि लोग और गांव के अन्य लोग जुटे थे।
डॉ. बाबासाहेब साढ़े छह बजे कोर्ट के काम के लिए धुले के लिए निकले। उनके साथ युवा उत्साही और डॉ. बाबासाहेब के एकनिष्ठ सेवक श्री डी.जी. जाधव और बोर्डिंग के सचिव डी. एम. मागाडे भी गए थे। कोर्ट का कामकाज निपटने के बाद डॉ. बाबासाहेब तारीख 19 जून, 1938 की रात साढ़े आठ बजे चालीसगांव में उतरे। डॉ. बाबासाहेब के आते ही प्रचंड भीड़ उमड़ी। 1 से 4 हजार का जनसमुदाय वहाँ जुटा था। डॉ. बाबासाहेब ने खाना खाने के पश्चात़ बोर्डिंग देखा। उसके बाद बोर्डिंग के सामने सभा की शुरूआत हुई। कवि बना सखाराम सालुंके ने पद गाया। उसके बाद कु. शांताबाई चव्हाण का भाषण हुआ। उसके बाद श्री दिवाण सीताराम चवहाण ने अपने भाषण में कहा कि, ‘‘आज बाबासाहेब की कृपादृष्टि के कारण संस्था की हालत संतोषजनक बन पाई है। आज संस्था को 1110 रुपयों की ग्रैंट मिलती है, जगह मिली है और उस पर 3500 के खर्च तक इमारत बनाई गई है। जल्द की बोर्डिंग के लिए खेत मिलने वाले हैं। संस्था को जिनके कारण अच्छे दिन देखने मिल रहे हैं उन्हीं के हाथों बोर्डिंग के उद्घाटन का समारोह संपन्न कराने का निर्णय मंडल की ओर से लिया गया है। विनति है कि डॉ. बाबासाहेब जल्दी ही हमें तारीख देंगे। इतना कह कर मैं अपना भाषण पूरा करता हूँ। ‘‘उनके बाद श्री डी. एस. मागाडे ने भाषण दिया। उन्होंने अपने भाषण में सन् 1927 से अब तक
* ख्., जनता, 16 जुलाई, 1938