138 19.6.1938 औरों का मुंह ताकने वालों का काम अधूरा रह जाता है - चालीसगांव - Page 177

156 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

के हालात के बारे में बताया। उसके बाद श्री एस. के. सोनवणे, बी ए ऑनर्स और श्री डी. जी. जाधव का भाषण हुआ। उसके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर भाषण के लिए उठे। उनके खड़े रहते ही तालियों की गड़गड़ाहट हुई।

डॉ. अम्बेडकर के भाषण का सारांश, ‘‘मुझे पता नहीं था कि आज मुझे भाषण करना होगा। यहाँ कई लोग इक्ट्ठे हैं इसलिए मैं कुछ दो-चार शब्द बोलता चाहूंगा। आजकल हम पर अंग्रेजों की सरकार का नहीं बल्कि काँग्रेस सरकार का शासन चलता है। अंग्रेज सरकार का मुझे 11 सालों का अनुभव है और काँग्रेस सरकार का 11 महीने का अनुभव है। काँग्रेस सत्ता में आने से पूर्व मुझे उससे काफी उम्मीदें थीं। लेकिन वे सब बेकार साबित हुई हैं। अंग्रेज सरकार के समय में अस्पृश्यों को पुलिस में प्रवेश नहीं था। एसेंब्ली में लगातार दो सालों तक संघर्ष कर, झगड़ कर मैंने वहाँ प्रवेश हासिल किया। अंग्रेज सरकार कुछ न कुछ दिया करती थी। अंग्रेज सरकार बंजर जमीन के संदर्भ में पहले अस्पृश्यों की अर्जी के बारे में सोचा करती थी। उनके कागजातों में भी यह दिखाई देता है। वे दफतरों में देखने को मिल सकते हैं। पुलिस विभाग में भी पहले अस्पृश्यों के बारे में सोचा जाना चाहिए था। लेकिन अंग्रेज सरकार ने हमारे लिए अलग से कुछ भी नहीं रखा है। उनका यही कहना था कि औरों की तरह ही जो लाभ होगा उसे आप ले सकते हैं। एक माँ के पेट से पदा हुए चार बच्चों में से सबसे बड़े को रोटी का बड़ा टुकड़ा मिलता है तब माँ अपने छोटे बच्चे के लिए अलग से रोटी का टुकड़ा छुपा कर रखती है। इस तरह काँग्रस ने हमारे लिए क्या रखा है? काँग्रेस हमारे लिए कुछ भी आरक्षित नहीं रखती है। फिर वह ‘माँ’ कैसे हुई? हमें माँ के दुलार की जरूरत नहीं है। हम मेहनत करेंगे और अपनी कलाई के बल पर कमाएंगे। हम डरेंगे नहीं और टोकरी लेकर किसी के दरवाजे पर मांगने के लिए भी नहीं जाएंगे। काँग्रेस की माया का क्या है? मैं गांधी का दुश्मन नहीं हूँ। जिसे जो सत्य लगता है वह वही करता है। मैं गांधी के काम की परवाह नहीं करता। गांधी की मुट्ठी में काँग्रेस है। ‘राजा बोले आर दल हिले’ इस उक्ति की तरह ‘गांधी बोलते हैं’ और काँग्रेस करती है। गांधी की अगर मर्जी हुई, अगर गांधी ने तय किया कि अस्पृश्यों को रियायतें दी जाएंगी तो अस्पृश्यों को खाना नसीब होगा। गांधी के खिलाफ कोई नहीं जाएंगे। दिल पसीजे तो मन में बिना लोभ के ममता पैदा होती है। माँ अपने सभी बच्चों से एक-सा प्रेम करती है। निखटू बच्चे से उसे ज्यादा ममता होती है। काँग्रेस और आपकी माँ है गांधी। जाहिर है कि गांधी को आपसे अधिक ममता होनी चाहिए लेकिन ऐसा बिल्कुल दिखाई नहीं देता। जो दूसरों के भरोसे रहते हैं उनका कोई काम नहीं होता। इसलिए हमें अपना काम खुद करना चाहिए। हम पर बहुत बड़ा संकट मंडरा रहा है जो आपको दिखाई नहीं देता। 2000 सालों से जो चलता आ रहा है आप उसके आदी हो गए हो। धुले में जो बात हुई बताता हूँ। धुले में हिंदु धर्म के शास्त्रज्ञानी है पाठक शास्त्री। उन्होंने किताब लिखी है ‘अस्पृश्यों की पूर्वोक्ती’ किसी