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काम से जाकर शास्त्रीजी से मिलने का निर्णय किया। पाठक शास्त्री को संदेश भेजा कि मैं 9, 10 बजे के आसपास आपसे मिलने आऊंगा। गाड़ी में बैठकर मैं पाठक शास्त्री से मिलने गया। एक आदमी के जरिए संदेश भेजा मैं पहुंच गया हूँ, आऊं क्या? वहाँ भोजन चल रहा था। शास्त्री ने संदेश नहीं भेजा, वह ख्ुद दौड़ते हुए आए। मैंने उनसे कहा कि मैं आपसे विमर्श करना चाहता हूँ। पाठशाला चलिए। उन्होंने कहा, ‘‘हम गाड़ी में ही चर्चा करते है।’’ मैंने उनसे बहुत बार कहा कि धुले की सड़कें संकरी हैं। ज्यादा देर तक गाड़ी में बैठ कर बातचीत नहीं हो सकती। लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ। कोई चारा नहीं रहा तो बंगले में जाकर चर्चा करनी पड़ी। उन्होंने चर्चा अच्छी की। हो सकता है मुझ जैसी शिक्षा प्राप्त करने वाले कम हों लेकिन मुझ जैसे को भी शास्त्रीजी की पाठशाला में प्रवेश नहीं मिल सका। कितना अपमान! मेरा दिल सोचकर छलनी होता है। आप इसकी कल्पना तक नहीं कर सकते। हमें जो भी कुछ पाना है वह केवल झगड़ कर ही पाया जा सकता है। काँग्रेस और गांधी की नीति के बारे में पिछले 11 महीनों में अच्छी तरह पता चल चुका है। नागपुर के संसद शरीफ के साथ जो हुआ वह इसका प्रत्यक्ष सबूत है। इसीलिए हम सभी को संगठन बनाकर अपनी पूरी सामर्थ्य को इक्ट्ठा कर सामना करना होगा। काँग्रेस 50 सालों से है। स्वतंत्र लेबर पार्टी डेढ़-दो सालों से है। काँग्रेस को अगर किसी से डर लगता हो तो वह स्वतंत्र लेबर पार्टी ही है। हम 15 लोग काँग्रेस को परेशान कर देते हैं। हालांकि 15 की जगह अगर 30 या 45 लोग होते तो हमारा ही राज चलता। 10-15 वर्षों में अगर हम एकजुट हो जाएं तो यकीनन कहता हूँ, हमारा ही राज होगा। आप सब लोग मुझे भगवान कहते हो। लेकिन मैं भगवान नहीं, मगर महार हूँ। तुम्हारा स्वतंत्र लेबर पार्टी ही भगवान है। पत्थर पर सिंदूर लगाने से वह भगवान बन जाता है, मैं उस तरह का भगवान हूँ। आपका सच्चा भगवान स्वतंत्र लेबर पार्टी ही है। सब स्वतंत्र लेबर पार्टी के सदस्य बनें साल भर में 4 आने देना कोई मुश्किल नहीं है। मैं बहुत बोला हूँ। भाषण के बाद बोर्डिंग की ओर से डी. एम. मागाडे ने पुष्पहार अषर्ण किया। धावजी ने कसरत की पाठशाला - व्यायामशाला की ओर से पुष्पहार अपर्ण किया। बहनों की ओर से सुश्री शांताबाई चव्हाण ने फूलमाला अर्पण की। आखिर डी.एम. मागाडे ने सबको धन्यवाद दिया और सभा बर्खास्त हुई। बाद में सुबह की गाड़ी से डॉ. बाबासाहेब मुंबई के लिए निकले।