158 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* महाराष्ट्रीय क्यों पिछड़ जाते हैं?
मध्य प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. खरे का स्वागत करने के लिए उनके कुछ मित्रों ने 4 अगस्त, 1938 को भारत सेवक समाज के दिवानखाने में एक दावत का कार्यक्रम आयोजित किया था। इस स्वागत समरोह में अध्यक्ष डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने विद्वत्तापूर्ण भाषण दिया। लोकतंत्र की सच्ची संकल्पनाओं और सिद्धांतों के बारे में विस्तार से समझाया। उनके कथन पर आज हर व्यक्ति को सोचना चाहिए। इस अवसर पर तुलजापूरकर और डॉ. खरे के भी भाषण हुए।
समरोह में श्री ना. म. जोशी, डॉ. गोपालराव देशमुख, डॉ. वाड, डॉ. बालिमा, मुंबई के प्रतिष्ठा प्राप्त डॉक्टर्स, वकील और नागरिक उपस्थित थे। दावत के बाद सभा के कामकाज की शुरूआत कर श्री दाजी साहब तुलजापुरकर ने डॉ. अम्बेडकर का नाम अध्यक्ष पद के लिए सुलझाया।
श्री दलवी ने उनके प्रस्ताव का समर्थन किया और डॉ. अम्बेडकर ने अध्यक्ष स्थान ग्रहण किया। इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने कहा,
हम यहाँ श्री खरे का स्वागत करने के लिए उपस्थित हुए हैं यह आप सब जानते हैं। हम क्यों उनका स्वागत करने के लिए तैयार हुए इसको थोड़ा विस्तार के साथ स्पष्ट करना जरूरी है। आज की सभा के लोगों पर नजर डालिए। ऐसा नहीं लगता कि हम सब एक ही भावना या कारण से यहाँ स्वागत के लिए उपस्थित हुए हैं। राजनीति के नजरिए से देखें तो आज यहाँ का जनसमुदाय यहाँ अलग-अलग कारणों से इक्ट्ठा हुआ है ऐसा ही लगता है। कुछ लोगों ने तो एक खास पार्टी काँग्रेस की राजनीतिक विचारधारा का संकेत देने वाले कपड़े पहने हैं। हिंदुस्तान के कई हिंदुओं को लगता है कि केवल यही एक दुनिया से मान्यताप्राप्त पक्ष है। अन्य कुछ लोग जो यहाँ आए हैं वे मेरी ही तरह देश के आज के उस अग्रगण्य पक्ष के सदस्य नहीं है। बल्कि उस पक्ष का वे विरोध करते हैं कुछ और लोग यहाँ उपस्थित हैं, जो राजनीति के बारे में उदासीन हैं। ये लोग जाति प्रेम के कारण या ऐसे ही किसी और कारण से यहाँ आए होंगे। जैसे हो, डॉ. खरे भी आज हमारे सामने तीन भिन्न स्वरूपों में खड़े हैं इसमें कोई शक नहीं। पहली बात वह महाराष्ट्रीयन है, दूसरी बात वह काँग्रेस वाले हैं और तीसरी बात कि मध्यप्रांत के पदच्युत किए गए मुख्यमंत्री के रूप में वह यहाँ उपस्थित हैं। आज यहाँ आकर इस कार्यक्रम का अध्यक्ष स्थान स्वीकरने के लिए
* ख्., विविध वृत्तः 14 अगस्त, 1938