139 4.8.1938 महाराष्ट्र के लोग क्यों पिछड़ जाते हैं? - अज्ञात - Page 181

160 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सोचें तो इस अवनति से भी जिन गिने-चुने महाराष्ट्रीयों को राजनीति में कुछ स्थान प्राप्त हो सका, आज उन्हें भी उस जगह से हटना पड़े यह महाराष्ट्रीयों को चुभे तो उसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं। इस तरफ से देखा जाए तो सद्बुद्धि के इस नजरिए से, डॉ. खरे जिस मोर्चे पर लड़ रहे हैं वह लड़ाई लड़ना हममें से किसी को अच्छा नहीं लगेगा इस बारे में मुझे यकीन है और इसी कारण डॉ. खरे के स्वागत के लिए मैं जो यहाँ आया हूँ वह एक महाराष्ट्रीयन बन कर नहीं। महाराष्ट्रीय कहलाने में मुझे गर्व महसूस होता है। अपने महाराष्ट्रीय होने का मुझे बेहद गर्व है यह बात मैं यहाँ विशेष जोर देकर बताना चाहता हूँ। महाराष्ट्रीयों में कुछ ऐसे गुण हैं जो अन्य प्रांत के लोगों में आपकी दिखाई नहीं देंगे। लंदन जैसी पराई जगह सभी प्रांतियों का मेला लगता है तो वहाँ यह फर्क आसानी से ध्यान में आता है। ऐसे समय किसके क्या गुणदोष हैं यह पहचानना सहजता से संभव होता है। डॉ.

खरे महाराष्ट्रीय हैं इसलिए जैसे मैं यहाँ नहीं आया उसी तरह वह काँग्रेस वाले है इसलिए भी मैं नहीं आया। डॉ. खरे काँग्रेस के अनुयायी बने है। उस संस्था के जो भी नियम होंगे उनका पालन करना भी उन्होंने स्वीकारा है। यह भी सीधी बात है। अनुशासन के अनुसार चलने को लेकर अपनी संस्था के अगर उनका काई मसला हो तो उसे हल करने में हम जैसे काँग्रेस में न होने वाले लोगों से उन्हें कोई सहायता मिलना संभव नहीं। मैं यहाँ इसलिए आया हूँ क्योंकि आज डॉ. खरे मुख्यमंत्री के हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। जनता, मतदाता और जिम्मेदार राजनीति के नजरिए से मुझे मुख्यमंत्री के ये हक बहुमूल्य लगते हैं। इसीलिए डॉ. खरे का स्वागत करने के लिए यहाँ उपस्थित हुआ हूँ।

पहले एक बार मैंने कहा था जो मैं यहाँ दोहराना चाहता हूँ कि मुख्यमंत्री जिम्मेदार राजनीति का केंद्र होता है जिस पर राज्य की व्यवस्था का संतुलन टिका रहता है। मेरी राय में जिम्मेदार राजनीति को दो मुख्यता बातों की आवश्यकता होती है। पहली- अपने प्रतिनिधि पर पैनी नजर रखने वाली जनता और दूसरी- जिन्होंने जनता के मतों का कौल नहीं लिया है उनके प्रति नहीं बल्कि जिन्होंने जनता का कौल लेकर अपने को जिताया केवल उनके प्रति जिम्मेदार मुख्यमंत्री। मुख्यमंत्री के कार्य की योग्यायोग्यता जांचने का निर्णायक एक जनता अपने पास लेकर बैठी रहती हूँ। यहाँ उसका अधिकार है। काँग्रेस वार्किंग कमेटी ने जिसे अपना अधिकार बताया है, मेरी राय में उससे राज्यपद्धति का पूरा माखौल उड़ता है।

काँग्रेस वर्किंग कमेटी ने दो बातों पर अमल किया है। मेरी राय में ये दोनों तत्व विथातक हैं और किसी भी लोकतांत्रिक देश में ये नामंजूर ही ठहराई जाएंगी। वर्किंग कमेटी द्वारा बताया गया पहला तत्व इस प्रकार है कि मुख्यमंत्री को अपने सहयोगियों को चुनने का अधिकार नहीं है। उसके सहयोगी मंत्रियों का चुनाव मतदाता अथवा विधिमंडल से ना जुड़े किसी बाहरी संस्था द्वारा ही चुने जाना चाहिए। मंत्रीमंडल की सामूहिक जिम्मेदारी की बात को प्रस्थापित करने के लिए गोलमेज परिषद् में हमने कैसी टक्कर दी है इस