140 5.8.1938 गंदगी जिन्होंने पफैलाई वही उसे साफ करें - मुंबई - Page 185

164 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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* गंदगी जिन्होंने फैलाई वही उसे साफ करें

मध्य प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. खरे मुंबई निवास के दौरान उनका सार्वजनिक सम्मान कर उनके द्वारा अपनाई गई नीति को अपने समर्थन की घोषणा करने के लिए कई सार्वजनिक समारोहों और सम्मान समारोहों का आयोजन किया गया। ऐसे ही एक समारोह का डॉ. खरे के समर्थकों द्वारा 4 अगस्त के दिन सर्वंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी के दीवानखाने में आयोजन किया गया था जिसमें डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर की अध्यक्षता में एक भोज का आयोजन किया गया था। इसी प्रकार दिनांक 5 अगस्त, 1938 के दिन डॉ. खरे का एक और सम्मान समारोह पहले के श्री जमनादास मेहता की अध्यक्षता में प्रचंड सभा का आयोजन कर किया गया।

सभा की शुरूआत में डॉ. खरे ने भाषण देकर यह स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई व्यक्ति के लिए नहीं वरन् जनतंत्र के तत्वों के लिए है मध्य प्रांत में की गई कारस्तानियों की जानकारी उन्होंने दी। उनके बाद डॉ. अम्बेडकर भाषण करने के लिए उठ कर खड़े हुए। अपने भाषण में उन्होंने कहा,

आज के इस अवसर पर मेरे भाषण का कोई प्रयोजन है ऐसा मुझे नहीं लगता। कल ही सर्वंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी के दिवानखाने में मेरी अध्यक्षता में एक सभा हुई। उस सभा में मैंने अपनी सारी बातें बताई थीं। कल ही अंग्रेजी में मेरा भाषण हुआ। हालांकि मराठी अखबारों के जासूस भी उसमें हाजिर थे। उन्होंने मेरे भाषण का तर्जुमा ठीक ही दिया गया होगा ऐसा मुझे लगता है।

आप जानते हैं कि मैं काँग्रेस का सदस्य नहीं हूँ। डॉ. खरे ने जो कहानी बताई वह उनके आपसी अंदरूनी विवादों में से एक है। मैं जाहिर है कि बाहर वाला हूँ। मुझे इस झमेले में क्यों पड़ना चाहिए ऐसा अगर कोई पूछे तो मैं उनके पूछने को गलत नहीं ठहरा सकता। मेरे पक्ष के लोग मुझे पूछ सकते हैं कि घर की रोटियाँ खाकर मैं ये लश्कर की रोटियाँ सेंकने में क्यों लगा हूँ। इसीलिए मुझे आज भाषण देने का अधिकार नहीं है। हालांकि पराया होने के बावजूद व्यापक अर्थों में मैं डॉ. खरे का पड़ोसी हूँ। हम समान वातावरण में जी रहे हैं। पड़ोस के घर में आग लगने पर अपने घर में तो आग नहीं लगी है सोचकर कोई शांति से बैठा नहीं रहता। क्योंकि एक बार जब आग लगती है तब उसकी आंच किसी को लगेगी यह कहा नहीं जा सकता। साथ ही आप जानते ही हैं कि मुंबई एसेंबली में मेरी स्थिति अपने गरमाहट देने के लिए चूजों को पंखों के नीच ले बैठी मुर्गी जैसी है। 10-12 युवकों को लेकर में एसेंब्ली में विराधी पक्ष में बैठा रहता हूँ। ये

* ख्., जनता, विविधवृत्तः 20 अगस्त, 1938