170 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
व्यक्ति ने बी.ए. किया था। वह व्यक्ति इतना प्रसिद्ध हुआ कि केवल उसका नाम और बीए लिखने से ही पोस्टमन उसे खत पहुँचा देता था। बीए होकर वह इतना मशहूर हो गया था। आज हमारे समाज में कई लोग बीए कर चुके हैं। इतना ही नहीं मजाक ही में कहना हो तो यहाँ कोई एकाध कंकड़ फेंकेगा तो वह किसी बीए पास को ही लगेगा। आज कुछ लोग बीए हुए हैं तब भी उन्हें एक बात ध्यान में रखनी होगी कि हमारी जिनसे टक्कर है वे अगड़े हैं। आज के जीवनकलह की आपाधापी में इन अगड़े लोगों से हम अगर उन्नीस साबित हुए तो हमारी खैर नहीं। क्योंकि आज सभी सत्ताधारी अगड़े लोग ही हैं। किसी भी दफतर में नौकरी माँगने जाओ तो वहाँ का वरिष्ठ अधिकारी अपने ही लोगों को काम पर रखते हैं यह खुला सच है। केवल बीए करने से आपको नौकरी नहीं मिलेगी। अगड़ी जाति के लोगों के साथ स्पर्धा में उतर कर अपनी बुद्धि का प्रभाव दिखाए बगैर केवल शिक्षा पाने से भला नहीं होगा। अगड़ी जातियाँ आपसे देबेंगी नहीं। उल्टे जिस तरह आज तक उन्होंने हमारा तथा हमारे बाप-दादों का दमन किया उसी प्रकार वे आपको भी दबा देंगे। इसीलिए आप इस प्रकार शिक्षा ग्रहण कीजिए कि हमारे सभी छात्र सरस साबित हों। अज्ञानी माता-पिता से जन्म पाकर बीए होने का दुरभिमान ना पालें। अपने कर्त्तव्य का अहसास रखते हुए कड़ी मेहनत से पढ़ाई करें। मैं जब बैरिस्टर बना तब अगड़े वर्ग के बैरिस्टर मुझे ‘महारडा बैरिस्टर’ कह कर नीचा दिखाते थे। लेकिन मैंने अपने कर्त्तत्व से उन सबके मुँह पर ताला लगा दिया है।
कुछ दिव्य किए बगैर हमें महत्व प्राप्त नहीं होता। बाकी समाज के साथ ऐसा नहीं है। जब हम सोने जैसा मूल्यवान काम करेंगे तब जाकर अन्य वर्गों के लोग उसे निकल जैसा काम मानेंगे। और उनके निकल के मूल्य के काम को भी सोने जैसा मूल्य प्राप्त है। आज यही व्यवहार चलन में है। ऐसा है कि अगर कोई महार, माँग या चमार महिला सोने के आभूषण पहन कर निकले तब भी उन्हें उच्च वर्ग के लोग नकली और झूठे मानते हैं। इसी प्रकार उच्च वर्ग की महिलाएं पीतल के आभूषण पहनती हैं तब भी वे सोने के ही हैं ऐसा लोग समझते हैं। अन्य सभी मामलों में भी ऐसी ही बातें होती हैं। कोई भी काम हम जब उनकी तुलना में शतशः अच्छा करेंगे तभी हमें उनकी बराबरी का माना जाएगा। यह सब करने के लिए हममें आत्मविश्वास होना जरूरी है।
आत्मविश्वास की तरह कोई अन्य दैवी शक्ति नहीं है। हमें अपना आत्मविश्वास नहीं गंवाना चाहिए। मान लीजिए, कुश्ती लड़ने के लिए अखाड़े में उतरा पहलवान अगर प्रतिस्पर्धी पहलवान की भुजाओं से डर जाए तो? क्या वह कुछ कर पाएगा? मैं यही मानता हूँ कि मैं जो चाहूँ वह मैं कर सकता हूँ। जाहिर है कि मैं यह अपने आत्मविश्वास के बल पर कहता हूँ। मेरे ऐसा कहने पर कुछ लोग मुझे घमंडी, शेखीबाज कह सकते हैं। लेकिन मैं कहता हूँ कि यह न घमंड है न श्ेखी। यह है आत्मविश्वास। आत्मविश्वास के बल पर ही मैं यह बोल सकता हूँ। मैं चाहूँ तो बड़े आराम से सवा लाख की बात करूँ। आप ही