172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उस पर रामानुज नेकहा कि, ‘‘महाराज, जो गणित के प्रमेय आप बता रहे हैं उन्हें मैंने छात्रावास में ही हल किया है। उसमें मुझे नया कुछ दिखाई नहीं दिया। इतना ही नहीं, आपने जो बताए उससे अगले प्रमेय भी मैंने जिस कापी में हल की हैं वह मेरे पास हैं। गणित के विद्वान प्रोफेसर ने इसकी कपियाँ देखीं। रामानुज ने अपनी कापियों में गणित के अजीब से अजीब सवाल हल किए थे। उन्हें देख कर प्रोफेसर महोदय ने गवर्नमेंट ऑफ इंडिया को लिख कर सूचित किया कि जो व्यक्ति गण्ति का इतना विद्वान है उसे आपने हर महीने 20 रु. की तनख्वाह पर काम पर रखा हुआ है। उसने इस बारे में
खेद प्रकट किया। इतना ही नहीं, उन प्रोफेसर महोदय ने उसे विलायत बुला कर उसके ज्ञान का फायदा लेने के उद्देश्य से उसे मोटी तनख्वाह देकर काम पर रखवाया। वहाँ के लोगों को गणित सिखाने के लिए वह रामानुज को ले गए। और वह खुद भी उसके छात्र बने। लेकिन रामानुज का ब्राह्मण्य बीच में आया। विलायत जाते हुए उन्होंने अपने लिए जरूरी रसोई का सभी सामन लिया था। इंटों का चूल्हा बना उस पर अपना खाना पका कर वह खाया करते थे। यूरोपीय लोग यवन हैं इसलिए उनके स्पर्श होने के करण सुबह-शाम उन्हें ठंडे पानी से नहाना पड़ता था। ठंड में जहाँ यूरोपीय लोग शुक्रवार के दिन ही हफते में एक दिन नहाया करते थे वहाँ ये पट्ठा हर रोज सुबह-शाम ठंडे पानी से नहाया करता था। इस प्रकार नहाने से उसे न्यूमोनिया हुआ और उसी में वह चल बसा। इसी तरह लिबरल पार्टी के श्री चिंतामणी बेहद बुद्धिमान, मेधावी हैं यह सब लोग जानते हैं। पूरे हिंदुस्तान में अब्बल दर्जे के संपादक और लेखक के रूप में व विख्यात थे। हमारे छात्रों में यह गलतफहमी आम है कि बीए की उपाधि मिलने के बाद आगे कुछ पढ़ना बाकी नहीं रहता। असल बात तो यह है कि बीए करने के बाद आप ज्यादा से ज्यादा शिक्षक के बिना पढ़ने के काबिल बनते हैं। यानि कि जो पढ़ना है वह आगे ही होता है। जिंदगी भर भी आदमी अगर पढ़ना चाहे तो विद्या के सागर के किनारे वाले घुटने तक के ज्ञान के पानी में ही वह जा पाएगा।
विद्या के साथ-साथ हममें शील भी होना जरूरी है। शील के बगैर विद्या किसी काम की नहीं। क्योंकि विद्या एक शस्त्र है। किसी के पास अगर विद्या रूपी शस्त्र हो और अगर वह शीलवान हो ता विद्या रूपी हथियार के सहारे वह औरों की रक्षा करेगा। लेकिन विद्यावान व्यक्ति अगर शीलवान ना हो तो वह अपनी विद्या से दूसरों को नुकसान पहुँचाएगा। विद्या तलवार की तरह हैं उसका महत्व उसे धारण करने वाले पर निर्भर करेगा। अज्ञानी इंसान किसी को धोखा नहीं दे सकता। किसी को धोखा कैसे दे यह उसे पता नहीं चलता। लेकिन पढ़े-लिखे लोग जानते हैं कि कैसे किसी को धोखा दें और किसी को धोखा देने के लिए जरूरी युक्तिवाद उनके पास होता है इसलिए वे सच को झूठ अैर झूठ को सच साबित कर सकते हैं। हर गाँव में वहाँ के ब्राह्मण व्यापारी और अन्य पढ़े-लिखे लोग चालाकी कर लोगों को कैसे ठगते हैं यह आपने देखा ही होगा।