180 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जो नैतिक तत्वों के खिलाफ है। यह कानून के खिलाफ हे। 490, 491, 492 की धाराएं बनाते समय- भले ये बंधन कामगारों की आजादी पर क्षुद्र बंधनस्वरूप ही थीं- फिर भी उन्हें लागू करने वालों को लग रहा था कि वे जो कर रहे हैं वह सही है या नहीं है।
आज कहा जा रहा है कि कामगारों को पास हड़ताल करने की आजादी ही नहीं होती। इस पर मेरा यही जवाब है कि जो ऐसा कहते हैं वे हड़ताल के सही मायने नहीं जानते। हड़ताल को अगर नौकरी के करार को भंग करना माना जाए ता यह भी मानना पड़ेगा कि हड़ताल आजादी के अधिकार का ही दूसरा नाम है। आप अगर मानते हैं कि हर इंसान का आजादी का अधिकार है तो आपको यह भी मानना होगा कि हर कामगार को हड़ताल करने का भी अधिकार है। आजादी दैवी अधिकार है ऐसा अगर आप मानते हैं तो हड़ताल पर जाने वाले हर कामगार को यह दैवी अधिकार प्राप्त है यह भी आपको मानना ही होगा।
ट्रेडस डिस्प्यूट बिल लाने के पीछे काँग्रेस की मंशा यही है कि हड़ताल को गैर-कानूनी ठहरा कर ‘हड़ताल करने’ को अपराध करार देना। इससे पहले किसी भी कानून के अनुसार हड़ताल गैर-कानूनी नहीं थे इस बात को स्पष्ट करते हुए डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर ने आगे कहा-
‘‘किसी भी कानून के तहत कामगारों की हड़ताल गैर-कानूनी साबित नहीं होती। ऐसे में कोई भी मुझे इंडियन पीनल कोड की धारा ‘120-अ’ की याद दिला देगा। 120-अ षड्यंत्र रचने वालों को सजा सुनाने वाली धारा है। हड़ताल को कामगारां के संघ द्वारा रचा हुआ षड्यंत्र करार मानते हुए इस धारा के सहारे कामगारों को हड़ताल करने का अधिकार नहीं है यह दिखाने की कोशिश विरोधी पक्ष के कुछ लोगों से होने की संभावना है। इसके लिए पहले उन्हें ‘हड़ताल करना’ यानी ‘षड्यंत्र रचना’ है यह साबित करना पड़ेगा लेकिन हड़ताल कभी षड्यंत्र साबित नहीं हो सकती।
‘हिंदुस्तान में अब से पहले कभी धारा 120-अ के तहत हड़ताल को अपराध साबित करने की कोशिश नहीं की गई है। लेकिन मेरे इस कथन को अंग्रेजी कानून में आधार प्राप्त है।’ इसके बाद डॉ. अम्बेडकर ने ‘दी लीगल पोजिशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स’ किताब में से हड़ताल को षड्यंत्र करार देने वाले एक अंग्रेजी केस के फाइनल जजमेंट में से एक परिच्छेद पढ़कर सुनाया। इस जजमेंट में यही कहा गया था कि, ‘‘किसी भी सामान्य कानून से हड़ताल गैर-कानूनी नहीं ठहरती और हड़ताल करना यानी षड्यंत्र रचना भी नहीं होता यही निष्कर्ष बताया गया था।
120-अ धारा के साथ भी यही बात है। जब तक यह बात साबित नहीं की जाती कि किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए हड़ताल की गई है तब तक ‘हड़ताल’ अपराध साबित नहीं होता। हड़ताल के कारण नुकसान होने की संभावना है लेकिन हड़ताल का उद्देश्य कभी भी नुकसान पहुंचाना नहीं होता। कामगारों की मांगे मंजूर करवाने के उद्देश्य से ही हड़ताल