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की जाती है।’’ इस प्रकार उपलब्ध किसी भी कानून के द्वारा हड़ताल को गैर-कानूनी नहीं करार दिया जा सकता यह बात बता देने के बाद डॉ. अम्बेडकर ने कहा-
‘‘इस बिल के तहत हड़ताल करने को अपराध करार देत हुए काँग्रेस सरकार ने कामगारों पर गुलामी लाद दी है।’’
मेरी राय में इस पर ‘कामगारों की नागरिक आजादी छीन लेने वाला कानून’ नाम ही अधिक स्टीक बैठता।
कई लोगों को लग सकता है कि सुलह की सभी कोशिशें नाकाम होने तक कुल दो महीनों तक इस बिल के जरिए कामगारों का हड़ताल करने की मनाही की गई है। और इस अवधि के बाद हड़ताल करने की उनहें पूरी छूट दी गई है। लेकिन ऐसा नहीं है। इस बिल में कुछ ऐसी धाराएं है जिनके लागू होने पर कामगारों पर यह पाबंदी हमेशा के लिए लाद दी जाएगी। कामगार कभी भी हड़ताल नहीं कर पाएंगे। क्योंकि कलापव्यय के साथ हड़ताल के लंबा खींचने का पूरा प्रबंध इस बिल में किया गया है।
बिल लागू किए जाने के बाद पहले साल में किसी भी हड़ताल पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। लागू की जाने वाली धाराओं को कामगारों की मान्यता मिलने जैसे हालात में या ना हों उन पर एक साल की गुलामी लादी जाएगी वह बात निश्चित है। कामगारों की इसमें से किसी भी तरह छुटकारा मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। इस एक साल की गुलामी के बाद क्या होगा?
उसके बाद, अगर कामगार हड़ताल करना चाहें तो उनहें पहले इसकी सूचना देनी होगी। यानी, पहले नोटिस देने में कुछ समय निकल जाएगा। नोटिस देने तथा उसका जवाब पाने के दरिमयान के समय में हड़ताल पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। उसके बाद सुलह कराने की कोशिशें होंगी। दो महीनों तक बातचीत चलेगी। बातचीत दो महीनों में पूरी होनी ही चाहिए यह जरूरी नहीं। कामगार और मालिक दोनों की बातें उभय पक्षों को ठीक लगें तो कामगारों का अहोभाग्य होगा। वरना बातचीत को चार महीनों तक जारी रखने का प्रावधान इस बिल में रखा गया है। यानी, कामगार और मालिक के बीच अनबन पैदा होने के बाद अगले चार महीने और पच्चीस दिन की अवधि में कामगार किसी भी तरह का कोई कदम नहीं उठा सकते।
इस दरमियान के समय में कामगार प्रचार नहीं करेंगे। संगठन नहीं बनाएंगे, सभा नहीं लेंगे, जुलूस नहीं निकालेंगे, भाषण नहीं होंगे कुछ नहीं किया जा सकेगा। इस दरमियान किसी भी तरह की तैयारी कामगार नहीं कर सकते। बिल के द्वारा इस पर पाबंदी लगाई गई है। अगर कोई कामगार इस प्रतिबंध को तोड़ते हैं तो उनके लिए सजा का प्रावधान है। और अगर इन चार महीनों के प्रदीर्घ समय में बातचीत अगर सफल नहीं हुई तब कामगार क्या करेंगे? सुलह का यह समय बीत जाने के बाद हड़ताल की घोषणा करने