144 22/23.10.1938 जब महात्माजी से मेरी मुलाकात हुई थी.... - अहमदाबाद - Page 217

196 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

बीच-बीच में कभी कह देते हैं कि ‘गांधी मेरे गुरु हैं’। आप भी ऐसा ही करें तो सब ठीक हो जाएगा।’’

मैंने हंस कर कहा, ‘‘किसी पर भरोसा हो तो मतभेदों के बावजूद उनके साथ काम किया जा सकता है। लेकिन मुझे गांधी पर भरोसा ही नहीं है। सो बीच-बीच में मैं उन्हें गुरु कैसे कहूंगा और उनके साथ काम कैसे करूंगा?’’

बात यहीं खत्म हुई। गांधी से विदा लेने के लिए एक बार फिर हम शेगाव गए। वहां हमसे पहले वर्धा की हमारी बातचीत पहुंची थी! वहां जैसे ही मैं गांधी के सामने पहुंचा तो महादेव देसाई गांधी से बोले-

‘‘खबर छे बापूजी, डॉक्टरसाहब सूं कहे छे?’’

‘‘क्या? क्या कहते हैं?’’ गांधी ने पूछा।

महादेव देसाई आगे यूं बोले मानो गांधी के सामने उनके बारे में अपनी राय प्रकट करने से अचकचाऊंगा।

‘‘वह कह रहे हैं कि उन्हें आप पर भरोसा नहीं है। इसीलिए वह आपके साथ काम करने के लिए तैयार नहीं हैं।’’

गांधी की सवालिया निगाह मेरी ओर उठी। मैंने कहा, ‘‘सच है। वह सही बता रहे हैं। मुझे आप पर जरा भी भरोसा नहीं है।’’

आज काँग्रेस पैसे वालों के आगे दब्बू बन गई है। उससे लोकहित के काम नहीं हो सकते। आज के हालात में काँग्रेस में जाकर किसी पर आक्रमण का या लड़ाई का कार्यक्रम चलाया नहीं जा सकता। इसीलिए मैं काँग्रेस में नहीं जाता।