145 26.10.1938 राजनीति में बोला हुआ तुरंत भूल जाना चाहिए - मुंबई - Page 219

198 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

की जिम्मेदारी लेता हूं। मध्यप्रांत वन्हाड से मुझे क्या लेना-देना? अगर आप लोग कुछ करना ही नहीं चाहते तो मुझे आपके प्रांत से कुछ लेना-देना नहीं रहेगा। आपके प्रांत में कुछ स्वार्थी, मीठा बोलने वाले लोग भी हैं और कुछ काम करने वाले लोग भी हैं। इसके बावजूद यहां अब तक कुछ हुआ नहीं है। आपको यह काम करना ही होगा। भाई जयवंत को ऑर्गनाइजर नियुक्त किया है। इसलिए उन्हें सहयोग देते हुए आपको काम करना होगा। फिर आप उनका विरोध क्यों करते हैं? हममें एक दोष है- हममें एक बार अगर झगड़ा होता है तो वह पीढि़यों तक चलता रहता है। यह ठीक नहीं, राजनीति में बोला हुआ तुरंत भूल जाना चाहिए। हरदास के बारे में मन में आदर है। हालांकि उनमें कुछ दोष भी हैं। हरदास ने टिकट नहीं दिया इसलिए पाटील को भी उनसे बदला लेना नहीं चाहिए।

हम अल्पसंख्यक हैं मेंढकी फूल कर भी बैल जितनी बड़ी नहीं हो सकती। इसीलिए किसी का साथ लिए बगैर राजनीति हमारे नियंत्रण में नहीं आने वाली है। पुराने आंदोलन केवल हम तक ही सीमित हुआ करते थे। उस वक्त हमें अंग्रेज सरकार से पाना था। अब अंग्रेजों की सरकार बची नहीं। आज की राजनीति बहुमत से चलने वाली है। बिना बहुमत के हम राजनीति को जीत नहीं सकते। इसीलिए हमें बहुमत बढ़ाना होगा। जयवंत के बारे में इतना परहेज क्यों है? वह कोई राजा तो नहीं है। अगर कोई बेहतर काम करता है तभी उसे बेहतर माना जा सकता है। कोई अगर खिलाफ काम करे तो मैं एक पल में उसे हटा दूंगा। स्वतंत्र लेबर पार्टी का जब कोई सदस्य बनता है तो वह किसी भी दूसरी पार्टी का सदस्य नहीं बन सकता। राजनीति के अलावा आप समाज कार्य, धार्मिक कार्य कर सकते हैं। कौन अधिकार में रहे इसका फैसला करना लोगों का कर्तव्य है। सदस्यों की निगरानी के लिए कोई व्यक्ति नहीं है शायद इसीलिए ऐसा हो रहा है। मुझसे कोई गलती हो तो यहां के लोग मुझसे पूछने आ जाते हैं।

हम सत्याग्रह उनके खिलाफ करते हैं हमें प्रेम हो। बच्चा मां के खिलाफ सत्याग्रह करता है। डॉ. खरे से मैंने इकरारनामा लिखवा लिया है। महात्मा गांधी ने कहा कि- ‘‘ये लोग (अस्पृश्य) अज्ञानी हैं। उनकी कोई महत्वाकांक्षा नहीं। अस्पृश्य मिनिस्टर को लिया होता, मुझे क्यों लिया? एक मिनिस्टर लेकर आपने उनके मन में महत्वाकांक्षा पैदा की।’’

आपने जब सत्याग्रह किया था तब क्या अग्निभोज उसमें शामिल हुआ था? वह अगर अपने हकों के लिए भी लड़ने के लिए तैयार नहीं है तो आपने गांधी के खिलाफ सत्याग्रह क्यों किया? जो व्यक्ति लड़ने के लिए तैयार हो उसकी खातिर लड़ना कर्तव्य बन जाता है।

जहां स्वतंत्र लेबर पार्टी का जो भी काम चलेगा वहां, उस ब्राँच में हेड ऑफिस का