145 26.10.1938 राजनीति में बोला हुआ तुरंत भूल जाना चाहिए - मुंबई - Page 220

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कंट्रोल होना जरूरी है। मैं अनुशासन को मानने वाला हूं। और मैं लगभग तानाशाह हूं। पैसों के मामले में हमें बेहद ईमानदार रहना होगा।

हर जिले से पांच-पांच सदस्यों को लाकर सभा कीजिए। सभा में अपने सातों एम.एल.ए. को बुलाइए। सब मिलकर स्वतंत्र लेबर पार्टी की स्थापना कीजिए।

मजबूत नींव पर खड़ी संस्था है काँग्रेस। उनके सामने हमारी एक नहीं चलती। उनका बहुमत होने के कारण हम कुछ नहीं कर सकते। इसलिए उनमें फूट डालना हमारा कर्तव्य है। डॉ. खरे दुश्मन पार्टी का पत्थर है। मैंने उसे गिराने की कोशिश की।

पक्ष सदस्यों की रकम किसी एक व्यक्ति के पास ना रखें। दो या पांच लोगों के नाम पर पैसा बैंक में रखना चाहिए। पार्टी के कमाकाज को देखने के लिए एक सचिव नियुक्त करें। (यह काम तो हो गया है) दफतर के लिए एक घर लीजिए। हर महीने जितना चंदा जमा होता है वह उसके लिए बने फॉर्म में लिख कर भेजें। आपका काम सलीके से चलने लगेगा तब जनता में सी.पी. और बेरार के लिए दो पन्ने आरक्षित कर देंगे। फिलहाल एक तात्कालिक समिति नियुक्त कीजिए। बाद में चुनाव कराएंगे। प्रचार के काम के लिए विभिन्न विभागों दो स्वतंत्र लेबर पार्टी की राजनीति के लिए अलग-अलग लोगों के सदस्यों की संख्या बढ़ा कर संगठन बनाना आवश्यक है।

सत्ता जिसके हाथ होगी उसका चुनाव बहुत एहतियात से करें, उत्तम व्यक्ति को ही चुनें। समाजकार्य क्या है, समाज का हित किस बात में है, समाज के लिए क्या चीज जरूरी है इसका अहसास उस व्यक्ति को होना चाहिए। काम करने वाले अब्बल दर्जे के लोगों को चुनने के बजाय अपने रिश्तेदारों की भर्ती की जाए तो कुछ नहीं होगा। अपने व्यक्ति के साथ मतभेद हो भी तो सदस्यों का बर्ताव इस प्रकार का हो कि सार्वजनिक सभाओं में हमारी पार्टी कहीं कमजोर ना पड़े।

पार्टी के सदस्य बनाइए, मध्य प्रांत का एक नक्शा बनाकर मुझे भेज दीजिए। उस नक्शे में जिले के विभाग बता कर उसमें हमारे कितने मतदाता हैं, साधारण मतदाता कितने हैं, कहां की सीटें आरक्षित हैं, कहां चुनाव लड़ाने पड़ेंगे आदि सभी जानकारी उसमें लिख कर भेजिए ताकि आगे की व्यवस्था का इंतजाम करना आसान हो जाएगा।