146 6.11.1938 मालिकों-मजदूरों के झगड़े मिटानेवाला कानून असल में मजदूरों का बेड़ा गर्क करने वाला कानून है - परेल (मुंबई) - Page 222

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रखने वाले मजदूर नेता चालाक हैं इसका निर्णय आप ही कीजिए। वह कहते है- ‘‘देशहित और देशभक्ति का सारा ठेका विरासत से काँग्रेस वालों के पास आता है। डॉ. अम्बेडकर जातिवादी हैं! डॉ. अम्बेडकर देशद्रोही हैं क्योंकि वह कारागार नहीं गए।’’ सिर्फ कारागार जाकर इंसान देशभक्त कैसे बनता है वह मेरी समझ में नहीं आता। यह बात सच है कि मैं कारगार नहीं गया। मेरे कारागार जाने का फायदा ही क्या? मैं अगर कारागार जाता तो यकीनन मुझे ‘ए’ क्लास मिलता और ‘ए’ क्लास में ऐसोआराम से जीने के बाद बाहर आकर अपने अनुयायियों को छकने की दांभिकता मेरे पास नहीं। मैं खुले मन से इस बात को स्वीकारता हूं। आज के काँग्रेसियों ने बस नाम भर का कारावास सहा है। असल कारावास सहा लोकमान्य तिलक ने और अन्य महाराष्ट्रीय नेताओं ने!

एकतरफा और झूठे प्रचार के कारण भले कुछ लोग झांसे में आएं लेकिन ऐसे प्रचार का झूठ निष्पक्ष व्यक्ति के सामने खुल ही जाता है। काँग्रेसवालों के गुरु महात्मा गांधी जब दूसरी गोलमेज परिषद गए थे तब वहां हिन्दुस्तान के इकलौते प्रतिनिधि के रूप में हमने गांधी की बड़ी जयकार की। गांधी के भक्त और अभिमानियों को मेरी साफ चुनौती है कि वे गोलमेज परिषद के मेरे और गांधी के सारे भाषण जो कि राउंड टेबल कॉन्फरेंस की प्रोसिडिंग्स में सुरक्षित हैं- पुस्तक रूप से इक्ट्ठा करें और डॉ. अम्बेडकर के भाषण

खंड। और महात्मा गांधी के भाषण खंड 2 में छप कर निर्णय करें कि देशभक्त कौन और देशद्रोही कौन? किसी निष्पक्ष और निस्पृह न्यायाधीश से इस बात का फैसला कराएं और इस सभा में मैं घोषणा करता हूं कि मैं उसे मानने के लिए तैयार हूं।

कल की हड़ताल सही मायनों में हड़ताल नहीं है। आज कम से कम हमारा मालिकों से कोई झगड़ा नहीं है। मुंबई सरकार ने दुराग्रह के कारण और मालिकों को खुश करने के लिए कामगारों को डुबोने वाला बिल पारित किया है। एसेंब्ली में यह बिल पारित हो ही चुका है- कौंसिल में पारित होने में भी देर नहीं लगेगी। इस बारे में हमारी - तमाम कामगार और मजदूर वर्ग की नापसंदगी व्यक्त करने के लिए हम कल एक दिन की सार्वजनिक हड़ताल करने जा रहे हैं। इस एक दिन के शांतिपूर्ण ढंग से चलने वाली हड़ताल के रूप में कामगार और मजदूर वर्ग की विराट शक्ति का स्वरूप हम दुनिया को दिखाने वाले हैं।

मैं चाहता हूं कि आप सभी हड़ताल में शामिल हों और उसे सफल कर दिखाएं। लेकिन मैं नहीं चाहता कि केवल मैं या कोई अन्य मजदूर नेता कहता है इसलिए आप हड़ताल में शामिल हों। जिस बिल के निषेध में यह हड़ताल पुकारी जा रही है उस बिल का निकृष्ट, बुरा स्वरूप और उसे लेकर अपने कर्तव्य के बारे में मन ही मन सोच कर हड़ताल में हिस्सा लेना अगर सही लगे तभी आप हड़ताल में शामिल हों। मेरा आपसे यही कहना है।

कल की हड़ताल सफलतापूर्वक संपन्न हो जाए तो अपना काम बन गया ऐसा बिल्­