202 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कुल ना समझें। ध्यान में रखें कि आगे आपको जो झगड़े लड़ने हैं उसकी यह नींव है इतना भर याद रखें। हजारों की संख्या में आज की सभा में आप उपस्थित रहें इसलिए आपको धन्यवाद देकर मैं आपसे विदा लेता हूं।
डॉ. बाबासाहेब का सार्वजनिक हड़ताल के बारे में किया भाषण लग रहा था कि लोगों के मन में गहरे तक छाप छोड़ गया था। कई दिनों से चल रहे प्रचार कार्य के कारण कामगारों में अपूर्व एकजुट हुई दिखाई दे रही थी।
सभा के बाद कामगारों का हर कामगार मोहल्ले से होता हुआ बरली तक प्रचंड जुलूस निकला, जिसे देख कर हड़ताल की सफलता का यकीन हो रहा था। रात में हजारों कामगारों का यह जुलूस इतने शांतिपूर्ण ढंग से, इतने अनुशासन से चला था, कि कोई भी उसकी प्रशंसा ही करता। हड़ताल के प्रचार में इतना बड़ा जुलूस इससे पूर्व कभी नहीं निकला था। स्वतंत्र लेबर पार्टी के समता सैनिक दल के कार्यकर्त्ताओं द्व ारा जो अनुशासन कायम रखा था वह प्रशंसनीय था। स्वतंत्र लेबर पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा ट्रेड यूनियन काँग्रेस के सहयोग से हड़ताल को सफल बनाने की जिम्मेदारी निभाने के लिए की गई कोशिश की प्रशंसा करना हमारे बस से बाहर की बात है। हड़ताल पूर्व की रात में सभी कामगार नेता हड़ताल की तैयारी करने में जुटे हुए थे। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर, बैरिस्टर जमनदास मेहता, डी. वी. प्रधान, डांगे, निमकर आदि लोग रात भर कामगार विभागों में घूमते रहे थे।