147 7.11.1938 हर हाल में मजदूरों के प्रतिनिधियों को ही चुनना होगा - परेल (मुंबई) - Page 224

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* हर हाल में मजदूरों के प्रतिनिधियों को ही चुनना होगा

7 नवम्बर, 1938 की मुंबई कामगारों की हड़ताल सफल हुई। शाम डेढ लाख कर्मचारियों की सभा कामगार मैदान पर हुई। हड़ताल से कामगार क्या सबक लें, अब परन्तु अगली नीति क्या होनी चाहिए? किस प्रकार प्रत्यक्ष संघर्ष के साथ हड़ताल करने से फायदा होगा? आदि बातों के साथ-साथ मजदूरों की लड़ाई की ही तरह आजादी की लड़ाई में सफलता पाने के लिए क्या करें? विधानपरिषद, म्युनिसिपलिटी, लोकल बोर्ड आदि राजनी­ तिक सत्ताएं मजदूर, किसान और जनता के नियंत्रण में आना कितना आवश्यक है आदि बातें डॉ. अम्बेडकर ने अपने भाषण में समझाईं।

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अपने भाषण में कहा-

आज शाम के अखबार में क्या छापा है देखिए। आपको विचित्र लीला दिखाई देगी। उसे अखबारों में जो खबरें प्रकाशित हुई हैं वे आश्चर्यजनक हैं। एक अखबार के मुताबिक, मजदूरों की हड़ताल सफल नहीं हुई और सभी मजदूर काम पर हैं। मैं नहीं बताऊंगा यह सही है या गलत। लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि मंबई के अखबार मुंबई के मंत्रीमंडल ने और पूंजीपतियों ने खरीद लिए हैं यही इससे दिखाई देता है। बेहद सफल हड़ताल के बारे में ऐसी झूठी और विपरीत हालात का चित्र खींचा जाए यह निषेधाई है। इसलिए इस बात की चिंता ना कीजिए कि अखबरों में क्या लिखा गया है। सामने जो दिखाई देता है वह देखिए और धीरज रखिए। आज आप सवा लाख कामगारों ने अपनी रोज की कमाई डुबो कर और अपने पेट की फिकर को छोड़कर यहां आकर इस बिल के प्रति अपना विरोध प्रकट किया है। काँग्रेस ने जो कानून बनाया आपने उसका विरोध किया। ऊपरी कौंसिल में इस बिल का मेरे मित्र अॅड. जोशी विरोध करने वाले हैं हालांकि उन्हें किसी से मदद मिलने वाली नहीं है। इसीलिए यह कानून हमारी छाती पर सवार होने वाला है। क्या हम सिर्फ यही करते रहेंगे कि काँग्रेस कानून बनाएगी और हम उसका विरोध करेंगे। केवल ण्ंडे फहराएंगे, स्लोगन्स चिढ़ाएंगे और फिर बैठे रहेंगे तो मैं कहूंगा कि आपके जैसा महामूर्ख कोई नहीं है। जिस काँग्रेस सरकार ने घोड़े पर सवार होकर हमारे लगाम लगाई उस काँग्रेस सरकार को उड़ा देना ही सही है। दुकान को कानून बनाने का मौका बिल्कुल ना दीजिए। अगर हमने पहले ही अकलमंदी दिखाई होती, ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को चुना होता तो यह कानून पारित ही नहीं होता। आज काँग्रेस के पास

* जनताः 2 नवम्बर, 1938