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इन भाषाओं में बोलना मेरे लिए मुश्किल हो जाता है। इधर मैं जब फ्रांस और जर्मनी गया था तब इन भाषाओं में बोलना मेरे लिए कठिन हो गया था। इसीलिए पढ़ना-लिखना हमेशा जारी रखना होगा। जैसे एक बार शराब पीने वाला आदमी बार-बार शराब पीने लगता है, जिंदगी भर पीता रहता है उसी प्रकार विद्यार्जन के साथ भी होना जरूरी है। विद्या प्राप्ति की असली चाहत किसके मन में पैदा होती है? परीक्षा के बाद जो अपनी किताबें नल बाजार में बेचता है उसे? मैं तो यही कहूंगा कि पत्नी से- बच्चों से अधिक जिसे विद्या से प्रेम है उसी को पढ़ने-लिखने का विद्या का चस्का लगा। अगर कभी साहूकारी के काराण मेरे घर पर कुर्की आए और तब के लिए अगर मेरी किताबों को छुए भी तो मैं उसे गोली से उड़ा दूंगा। आप पढ़े-लिखे बच्चों में सुन्दरता के प्रति लगन मुझे दिखाई देती है। शादी में भी आप देखते हो कि लड़की सुन्दर है या नहीं? आप देखते हैं कि वह आपको पसंद है या नहीं? लेकिन यही अधिकार आप लड़कियों को भी दें। कई सुंदर लड़कियां कुरूप व्यक्ति के स्वाधीन होती हुई मैंने देखी हैं। मैं इस देश से ऊब चुका हूं। लेकिन मुझे अपने कर्तव्य का अहसास था इसलिए मुझे यहीं रहना पड़ा। हालांकि यहां का धर्म, सामाजिक रचना, सुधार और संस्कृति आदि से मैं बेहद ऊबा हूं। लेकिन मुझे अपने कर्तव्य का अहसास है। इसीलिए मुझे यहां रहना पड़ा। I am at war with Civilization, यहां के करोड़पति मारवाडि़यों के घरों में क्या दिखाई देगा? उनके घरों में स्टैच्यू, फर्नीचर, पेंटिंग और किताबों में से कोई चीज दिखाई नहीं देगी। यही बात ब्राह्मणों की। किसी ब्राह्मण कलर्क को तनख्वाह मिलते ही वह पहले अपनी पत्नी के लिए सोने का कोई गहना बनाने की फिराक में होता है। क्योंकि संकट की घड़ी में सोना काम आता है ना। दुनिया में अगर सिर्फ जीना ही लक्ष्य हो तो पशु और इंसान के बीच फर्क ही क्या? इंसान सुंदरता को जोड़ कर रख सकता है, पशु यह नहीं कर सकता। केवल कॉलर खड़ी कर या गले में नेक टाई लटकाने से सौंदर्य बढ़ता नहीं। मैं आज तक अट्ठारह-उन्नीस बार विलायत गया था। मेरे साथ कई लोग भी आए थे। आज उन सभी को वर्णाश्रम धर्म मंजूर है! उन पर हमारी यात्रा का कोई असर पड़ा हुआ दिखाई नहीं देता। क्या जिंदगी है। हिंदू धर्म की सारी गंदगी उन्हें मंजूर है। आप गंदगी में पड़े रत्न हैं। बेहद गंदे पानी में इत्र की बूंद की तरह आपकी हालत है। आपके माता-पिता पढ़े-लिखे नहीं हैं। घर में दरिद्रता का साम्राज्य। सो इस मैल को साफ करना आपका कर्तव्य है। बाइबल में मैंने पढ़ा है कि अगर नमक ही अलोना हो जाए तो बाकी चीजों में स्वाद कहां से आएगा? कोई भी कार्य करने के लिए अपने अंदर गुणों का ठहराव जरूरी है। और गुणों के ठहराव के लिए कम से कम एक पीढ़ी का बीतना जरूरी है। खुद के सुधरे बगैर औरों को आप क्या सुधारेंगे? सुधार की जड़ें विरासतों में धंसनी चाहिए। आप में अगर गुणों की कमी हो तो पूरी-पूरी कोशिश कर उन्हें पा लें।