150 6.1.1939 स्वराज यानी स्वतंत्रता, इंसानियत और समान अधिकार - महाड - Page 232

211

150

* स्वराज यानी स्वतंत्रता, इंसानियत और समान हक

6 जनवरी, 1939 को महाड में 6000 किसानों के सामने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण हुआ। अपने भाषण में उन्होंने कहा-

प्रिय बहनों और भाइयों,

नगर, खानदेश, निजाम के राज्य में मैं दौरे पर गया था। अभी हाल ही में लौटा हूं। यात्रा की तकलीफों के कारण सोचा था कि चार दिन आराम करूंगा। फिर भी इस सभा में मुझे बोलना पड़ रहा है। इसलिए मैं ज्यादा देर तक नहीं बोल पाऊंगा। 10-12 मिनटों तक मैं बोलूंगा। मैं केवल तीन बिंदुओं पर बोलूंगा। सात प्रांतों में काँग्रेस का राज है। बंगाल और पंजाब प्रांतों में अन्य पार्टियों को नेस्तताबून कर काँग्रेस का राज स्थापन करने की कोशिशें चल रही हैं। तीन चौथाई हिस्से में काँग्रेस का राज है।

मेरे एक मित्र ने मजाक में कहा- ‘‘काँग्रेस द्वारा अधिकार ग्रहण को आज 18 महीने बीते हैं। कोई महिला 18 महीने में दो बार बच्चा पैदा करती। लेकिन ‘ये’ औरत अभी पेट से भी नहीं है। यह बात बिल्कुल सही है। इस दौरान जनता के सुख-संतोष की जानकारी देना अनुचित नहीं होगा।

पहला, हिंदु-मुसलमानों की एकता का मसला महत्वपूर्ण है। स्वतंत्र लेबर पार्टी की सभा में यह मसला नहीं उठाया जाता। वहां हम केवल पेट के मसलों पर विचार करते हैं। पहले पेट, पूजा फिर भगवान की पूजा जैसा हमारा वहां बर्ताव होता है। लेकिन अन्य सवाल पैदा होते हैं तो पेट के सवाल अपने आप हाशिए पर चले जाते हैं।

इस देश में मुसलमानों की संख्या 8-9 करोड़ है। ये लोग मजदूरी करने वाले या गुलाम नहीं हैं। महराष्ट्र में नहीं लेकिन हिन्दुस्तान के अन्य हिस्सों में औरंगजेब, अकबर आदि मुसलमान राजाओं की सत्ता थी। मुसलमानों की महत्वकांक्षा है कि वे राज्य की सत्ता को काबीज कर लें। कोई ये ना समझें कि हमारा सामना केवल हिन्दुस्तान के 9 करोड़ मुसलमानों से है ऐसा कोई ना समझें। अफगानिस्तान, इराक, पार्शियां, तुर्कस्तान, इजिप्त में भी मुसलमानों की सत्ता है जो समय आने पर उनका साथ देती है। मुसलमानों का कहना है, ‘एक बार फिर पानीपत होने दो।’ इसलिए हिन्दु-मुसलमानों के बीच एकता होना जरूरी है। सत्ता जिस काँग्रेस पार्टी के हाथ है उस पर यह सारी जिम्मेदारी है। हम पर नहीं। हिन्दु-मुसलमानों की लड़ाई के बारे में काँग्रेस ने क्या किया? जानबूझ कर वह

* जनताः 21 जनवरी, 1939