150 6.1.1939 स्वराज यानी स्वतंत्रता, इंसानियत और समान अधिकार - महाड - Page 233

212 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

निष्क्रिय रही, उसने कुछ नहीं किया!

पिछले पांच-दह दिनों में पटना में मुस्लिम लीग की सभा हुई। उसमें हुए भाषणों से जो ध्वनित होता है उस पर ध्यान दीजिए। मुसलमान समाज ने हिंदुओं के खिलाफ सत्याग्रह करने की घोषणा की है! लेकिन मुसलमानों का यह सत्याग्रह गांधी के सत्याग्रह की तरह नहीं है! मुसलमान बहुजन समाज की यह कतई मांग नहीं है कि, ‘‘हिन्दुस्तान का टुकड़ा काट कर हमें दो।’’ उनकी मांग है कि मुसलमानों का मुख्यमंत्री लीग का हो। काँग्रेस ने कुछ प्रांतों में मुसलमान मुख्यमंत्री लिए हैं। फिर मुंबई में ही लीग के आदमी को क्यों नहीं लेते? नुरी के बदले देहलवी को क्यों नहीं बनाते? आज सांसद नुरी महीना 500 रुपए लेते हैं वही सर देहलवी भी लेते। उसमें गलत क्या होता समझ में नहीं आ रहा! फिर पानीपत करना है क्या?

दूसरा मसला साम्राज्यवाद को खदेड़ने का है। अंग्रेजों का साम्राज्य तो गया लेकिन यहां के गूजर, साहूकार, जमींदार, मिल-मालिक यहीं हैं। वे आपका खून चूसेंगे। साम्राज्यवाद हटे यह मेरी भी इच्छा है। लेकिन काँग्रेस क्या करती है? केन्द्र सरकार (फेडरेशन) बेहद घिनौनी है। ऐसे डाकू, राजे-रजवाड़ों के हाथ हमारी गर्दन पकड़ाने का इरादा अंगे्रज सरकार रखती है। काँग्रेस के हाथ कौन-सी उपाय-योजना को लागू करना चाहती है? अंग्रेज सरकार यही फेडरेशन हमारे माथे पर मारना चाहती है! काँग्रेस के नेता इसका क्या उपाय करेंगे?

मुझे बिल्कुल यकीन नहीं है कि साम्राज्यवाद के कट्टर विरोधक काँग्रेस वाले फेडरेशन के खिलाफ हैं। एक बड़े काँग्रेस भक्त हवा बदलने के लिए विलायत गए थे। उन्हें क्या रोग था यह मुझे पता नहीं। काँग्रेसी राजनीति के इस बड़े झब्बू ने अंग्रेजों को आश्वासन दिया कि फेडरेशन के खिलाफ हम चाहे जितना हल्ला मचाएं, फिर भी हम उसको स्वीकारेंगे। देशभक्त सुभाष बाबू की फेडरेशन के विरोध की घोषणा काँग्रेस पार्टी के मुखपत्र से- गौमुख से कहिए चाहें तो- कही हुई थी। दूसरी ओर श्री सत्यमूर्ति ने पर्चा निकाला कि सुभाष बाबू का इस विषय पर बोलने का अधिकार नहीं है।’ सत्यबाबू के लिखे काँग्रेस के किसी नेता द्वारा खंड़न नहीं किया गया। इसी से पता चलता है कि दाल में कुछ काला है। वाइसराय के साथ एक आदमी की बातचीत हुई जो इस प्रकार थी-

आदमीः काँग्रेस फेडरशन का स्वीकार नहीं करेगी।

वाइसरायः फिर क्या करेगा? और आप कैसे कह सकते हैं?

आदमीः सुभाष बाबू की नीति से।

वाइसरायः हमने सुभाष बाबू की घोषणा सुनी है। लेकिन आपका गांधी कहां कुछ कह रहा है? गांधी ने मौन क्यों रखा है?