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हर सैनिक को आगे से स्वतंत्र लेबर पार्टी के लिए अब के बाद विशेष कोशिश करनी होगी।’’ श्री प्रधान के परिचयात्मक भाषण के बाद डॉक्टरसाहेब भाषण के लिए उठे। उन्होंने अपने भाषण में कहा-
समता सैनिक दल की आज की सालाना परेड के दिन मुंबई के सभी सैनिक इतनी बड़ी संख्या में जुटे हैं इस बात की मुझे बड़ी खुशी है। आज यहां इक्ट्ठा होकर उन्होंने अपने अनुशासन, संगठन और स्वार्थ त्याग का जो प्रदर्शन किया है वह बहुजन समाज में आदर्श के तौर पर माना जाएगा। अपने पैसे से वर्दी सिला कर अपने पक्ष के प्रति आपने जिस लगन को व्यक्त किया है वह सचमुच प्रशंसा के काबिल है। कुछ लोगों को लगता है कि यह दल मेरे और दोस्तों के बड़पन्न के लिए बनाया गया है। लेकिन जो इस दल का इतिहास जानते हैं उन्हें इस दल की स्थापना करने में कितना उदात्त और उज्जवल लक्ष्य हमारे सामने है इसका पता है।
1926-27 के आसपास इस दल की स्थापना ..................... महाड के चवदार तालाब के सत्याग्रह से शुरू हुई। उस वक्त महाड सत्याग्रह किसी भी तरह के विघ्न के बिना सफल होने के लिए ऐसे संगठित दल की बेहद आवश्यकता थी। हमने जिस समता सैनिक दल की स्थापना की है उसके इतिहास पर नजर डालने और कुल हालात के बारे में सोचने से पता चलेगा कि इस दल की स्थापना मैंने अपनी जय-जयकार कराने या किसी बाबाजी जैसा काम करने के लिए नहीं की है। अगर किसी को ऐसा लगता हो तो महाड तालाब के लिए हुई लड़ाई से सही-सही जवाब मिल जाएगा। हिंदुस्तान के कई धार्मिक समुदायों में से हिंदु समुदाय में अस्पृश्यों की गिनती होती है। हिंदू समाज के स्पृश्यों द्वारा अस्पृश्य माने गए अपने ही समाज बांधवों पर होने वाले अन्याय, जोर-जुल्म, विषमता का बर्ताव और सीख देना आदि बातों को रोकने के लिए मुख्य रूप से इस दल की स्थापना की गई है। जिस समाज में इंसानियत के सहारे जिया नहीं जा सकता, प्रकृति प्रदत्त अधिकारों का जहां समता के साथ उपभोग नहीं किया जा सकता, जिस धर्म पर विषमता रूपी मैल की परतें चढ़ी हैं उस धर्म को त्याग कर इंसानियत जानने वाले धर्म का निर्माण करने के लिए जो कार्य करना पड़ रहा है उस पवित्र और उज्जवल कार्य को करने के लिए इस दल की स्थापना की गई है। इस कार्य की शुरूआत महाड के चवदार तालाब के सत्याग्रह से किया गया है और उस सत्याग्रह को सफल भी बनाया है। इसी प्रकार जहां सार्वजनिक तालाब हैं, कुएं हैं, नल हैं वहां इसी प्रकार समान अधिकार की लड़ाई लड़कर हमें अपना कार्य करना है। महाड तालाब का सत्याग्रह इसलिए नहीं किया गया था कि हमें पीने के लिए पानी नहीं मिलता। इस तालाब के पानी के बगैर हमारा काम रुका नहीं था। हम छटपटा कर मर नहीं रहे थे। वह लड़ाई पीने के लिए पानी चाहिए इसलिए नहीं छेड़ी गई थी। यह लड़ाई इसलिए छेड़ी गई थी कि उस तालाब का