151 8.1.1939 समता सैनिक दल का सैनिक निर्भय योद्धा ही तो है - परेल (मुंबई) - Page 237

216 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पानी सभी जाति के, धर्मों के, पंथों के लोगों को समान रूप से पीने के लिए मिले। एक हक दिलाने के लिए यह लड़ाई थी। यही बात नासिक के कालाराम मंदिर प्रवेश के सत्याग्रह की भी थी। हम केवल भगवान के दर्शन के भूखे नहीं थे। पिछले दो हजार सालों में हिंदुओं के भगवानों के दर्शन अस्पृश्यों को नहीं हुए थे। लेकिन उससे अस्पृश्यों का जीवन कहीं अड़ा नहीं था। नासिक की मंदिर प्रवेश की लड़ाई केवल हिंदू समाज में हमारे समानता के अधिकारों की रक्षा के लिए था। उस सत्याग्रह की लड़ाई में लोगों को जो पीड़ा हुई थी, जो दुखदायी तकलीफें झेलनी पड़ीं वे सब केवल इसलिए थी ताकि यह स्थापित किया जाए कि हम भी इंसान हैं और अन्य इंसानों की तरह हमें भी मंदिर में प्रवेश करने का हक है। हम भी औरों की तरह ही इंसान हैं और हमारे मंदिर प्रवेश से ये हिंदू अपवित्र कैसे होते हैं यही हमारी समझ में नहीं आ रहा था। स्पृश्य हिंदुओं द्वारा हम पर लादा गया यह छुआछूत का गंदा कलंक धोने के लिए, हम भी इंसान हैं। और किसी तरह से हम अपवित्र नहीं हैं यह दिखा देने के लिए कालाराम मंदिर प्रवेश की लड़ाई हमें लड़नी पड़ी थी।

इस प्रकार की उज्ज्वल तत्वों वाली लड़ाईयां लड़ने के लिए ही हमारे समता सैनिक दल की स्थापना की गई है और यही समता सैनिक दल की पूर्वपीठिका है। इससे पता चलता है कि इस दल का निर्माण निजी कारणों से नहीं हुआ है। इस देश के हिंदू समाज में सच्ची समता स्थापित करने के लिए समता दल की स्थापना की गई है।

समता सैनिक दल का सैनिक यानी समाज सेवा के लिए हथेली पर सिर रख कर लड़ने के लिए तैयार निर्भय योद्धा ही है। इंसानियत के लिए समता का उज्ज्वल सिद्धांत अपने अंतर्मन में जगाए रख कर उसे अपने कार्य की पूर्तता करनी होगी। इसके लिए सभी को कसम खानी होगी कि वे कभी किसी प्रकार के जाति भेद को नहीं मानेंगे, महार भंगी, मांग जैसे ऊंच-नीचे के भेदभाव को नहीं मानेंगे, सोचेंगे कि मैं इंसान हूं, मैं सभी के साथ इंसानियत से ही पेश आऊंगा और समाज से विषमता का जहरीला बीज नष्ट करूंगा। जिसकी ऐसी सोच और ऐसा बर्ताव होगा वही समता दल का असली सैनिक होगा। कुल हालात पर सोचते हुए यह बात भी ध्यान में रखनी होगी कि अपना दल आजादी की लड़ाई में पिछड़े वर्ग के मोर्चे की एक जुझारू टुकड़ी है। अपनी हर कृति से आपको देश का आदर्श सैनिक बनना होगा। सेना की टुकड़ी के रूप में पूरे देश में आपकी कीर्ति होनी चाहिए। अच्छे गुण, अनुशासन, और संगठन के साथ अपना दल फैलादी बनना चाहिए। कहा जाता है कि काले तवे का मैल जाता है तो वह भी चमकने लगता है, इसी प्रकार स्वच्छ बर्ताव और समता का भाव मनमें रखते हुए अपने आपको और पूरे समाज को चमकाना होगा। कई हालात के कारण तवे पर मैल चढ़ा है। और तवा काला और गंदा दिखाई दे रहा है। लेकिन अगर इसे मेहनत से साफ किया जाए, उसके ऊपर जमी मैल को हमेशा के लिए हटाने की कोशिश की जाए तो यकीनन सफलता