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मिलेगी और आखिर वह आईने की तरह चमकने लगेगा। इसी प्रकार हालात के कारण हमारे समाज में अगर कोई अनिष्ट रिवाज कायम हो चुके हों तो समय रहते जाग कर हमें उन अनिष्ट रिवाजों के चलन को खत्म करना होगा। जैसे शराब पीने, पान-तम्बाकू
खाने पर हम अगर अपने शरीर का, समय का दुरूपयोग करते हो तो समय रहते जाग कर बुरी लतों को त्याग देना चाहिए। इस प्रकार सभी तरह की अनिष्ट बातों को नियंत्रण में रखा जाए तो कोई हम पर किसी तरह के आरोप नहीं लगाएगा। किसी प्रकार पीड़ा पहुंचाने का साहस कोई नहीं करेगा। इस प्रकार उज्ज्वल लक्ष्य के साथ काम करने के बावजूद अगर बिना वजह कोई हमारी बुराई करे तो हाथी चलता है, कुत्ता भौंकता है’ की तरह वह होगा। ईमानदारी के साथ काम करते रहो तो जानबूझ कर कोई शरारत भरी आलोचना करे तो उनकी परवाह करने की जरूरत नहीं।
इस प्रकार समता सैनिक दल का काम दिनोंदिन सफल हो रहा है यह देखकर मुझे धन्यता महसूस होती है। लेकिन अपने दल का यह लोकोपयोगी कार्य देख कर हमारे समीक्षकों और विरोधियों के पेट में दर्द होने लगा है। काँग्रेस सरकार के कार्यकाल में 7 नवम्बर, 1938 के दिन हुई एक दिवसीय सार्वजनिक हड़ताल के दौरान पुलिस के गोली चलाने के अत्याचारों के संदर्भ में पूछताछ काम आजकल चल रहा है। पूछताछ के दौरान उसकी आलोचना करने का मेरा कोई इरादा नहीं है। लेकिन जिन सैनिकों ने आज तक समाज सेवा का उज्ज्वल कार्य किया है उसकी मुंबई के मुख्यमंत्री श्री बालासाहब खेर और काँग्रेस के एक बड़े नेता श्री वल्लभभाई पटेल जैसे प्रमुख नेताओं ने प्रशंसा की है।
मुंबई मंत्रीमंडल की तनख्वा के बारे में मैंने जो भाषण किया था उसका जवाब देते हुए सम्माननीय खेर ने कहा था कि स्वतंत्र लेबर पार्टी के कार्य में मदद करने वाले समता सैनिक दल के स्वयंसेवकों ने बिना किसी वेतन के स्वार्थ त्याग से, स्वाभिमान के साथ और अनुशासन के बल पर कितना उज्ज्वल काम किया है यह हम जानते हैं। ये स्वयंसेवक अगर इतने उज्ज्वल तरह का स्वार्थ त्याग अगर कर सकते हैं तो हम एसेंब्ली के मंत्रियों को स्वार्थ त्याग करते हुए हर माह रु. 500 की तनख्वाह में काम करने में हर्ज ही क्या है? यही बात श्री वल्लभभाई पटेल के कथन से भी स्पष्ट होती है।
पिछले प्रांतीय एसेंब्ली के चुनावों के बाद पुणे में शनिवार वाड़े के सामने स्वयंसेवकों के कार्य के बारे में भाषण देते हुए श्री वल्लभभाई ने कहा था कि, ‘‘संगठन, अनुशासन, कार्य की लगन, उसे सफल बनाने की ताकद आदि कसौटियों के बारे में सोचें तो स्वतंत्र लेबर पार्टी के स्वयंसेवक ही काँग्रेस के स्वयंसेवकों से बेहतर साबित होंगे। स्वतंत्र लेबर पार्टी के स्वयं सेवकों के गुण अन्य स्वयंसेवकों को अवश्य अपनाने चाहिए आदि।’’ हमारे समता सैनिक दल के सैनिकों में 90 प्रतिशत तक महार युवक हैं। इस देश में अंग्रेज सरकार की सत्ता जब से है तब से लेकर अगर आज तक के इतिहास को देखा